ठग्स आॅफ मुंबई: जिसके खिलाफ चल रही होती थी सीबीआई जांच, उसे बनाते थे शिकार

ठग्स आॅफ मुंबई: जिसके खिलाफ चल रही होती थी सीबीआई जांच, उसे बनाते थे शिकार
सांकेतिक चित्र

साल 2013 की फिल्म स्पेशल 26 की पूरी नकल तो नहीं लेकिन तकरीबन उसी ढंग से मुंबई में करोड़ों की फिरौती मांगी गई. एक ठग हरियाणा का था और दूसरा ठाणे का, दोनों ने मिलकर पिछले 7 सालों में कई लोगों को चूना लगाया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 15, 2018, 8:31 PM IST
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'अभी केस लास्ट स्टेज में है और जांच टीम एनकाउंटर के मूड में है. समझ कि एनकाउंटर नहीं भी हुआ, तो भी तू लंबा फंसेगा.' जैसे ही सीबीआई अफसर ने फोन पर ये बात कही तो विनोद के माथे पर पसीना आ गया. 'तो सर, कोई रास्ता निकालो, कैसे भी करके बचाओ मेरे को इस सबसे, प्लीज़.' सीबीआई अफसर ने विनोद की घबराहट भांप ली और फिर कहा -

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अफसर : क्या करेगा अभी. देख इन्क्वायरी टीम में सबको खिलाना पड़ेगा, नीचे से ऊपर तक. तू इंतज़ाम कर तो कुछ हो सकता है...
विनोद : आप बताओ सर, मैं करता हूं इंतज़ाम. आप जो बोलो दस पेटी, पंद्रह पेटी... मैं करता हूं ना.
अफसर : पागल है क्या रे? पंद्रह पेटी से क्या होगा? सीबीआई टीम है. बड़ा घोटाला है, सबको माल पीटने का है. एक खोखा लगेगा.


विनोद : एक खोखा! इतना मैं कहां से लाऊंगा सर? कुछ तो आप मदद करो प्लीज़..
अफसर : मदद ही तो है यार. अब तू खुद सोच कि एनकाउंटर में मर गया तो? जान की कीमत एक खोखा भी नहीं है क्या?
विनोद : सर, आई शपथ मैं सच बोल रहा हूं, मेरे पास इतना नहीं है. मैं खुद को बेच भी दूंगा तो 25-30 पेटी से ज़्यादा नहीं होगा. आपको अभी तक किसी भी रकम के लिए मना किया है क्या? प्लीज़ आप हेल्प करो ना सर..

विनोद और उस अफसर के बीच 50 लाख रुपये की रकम पर बात तय हुई. विनोद ने वादा किया और 50 लाख का इंतज़ाम करने में जुट गया. इस जुगत के बीच उसे यही खयाल आता रहा कि कैसे वो इस चक्कर में फंस गया था. पिछले साल तक सब ठीक था लेकिन पिछले साल के आखिरी महीनों में हालात बिगड़ना शुरू हुए. मुंबई के कांदिवली सबअर्ब के चारकोप में रहने वाले विनोद को पतपेढ़ी यानी पोस्ट बॉक्स के ठेके का धंधा था.

इसी ठेके में कुछ गड़बड़ियों की शिकायत के बाद घोटाले की भनक लगी तो सीबीआई जांच शुरू हो गई. साल 2017 के आखिरी महीनों में दो जांच अफसरों अश्विनी और साजिद ने विनोद से कॉंटैक्ट किया और कहा कि वो सीबीआई एनक्वायरी टीम से हैं और इस बड़े घोटाले में विनोद को फंसने से बचा सकते हैं. विनोद को दोनों की बातें सुनकर राहत महसूस हुई और वह उन दोनों की हर बात मानने लगा.

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ये दोनों रिश्वत के तौर पर विनोद से तकरीबन साल भर तक अच्छी खासी रकम ऐंठते रहे. पिछले दिनों अश्विनी और साजिद ने विनोद पर एक करोड़ रुपये देने का दबाव बनाया और विनोद के नेगोसिएशन के चलते बात 50 लाख रुपये पर ठहरी. इधर, विनोद इस रकम का इंतज़ाम कर रहा था और उधर, अश्विनी और साजिद आगे की रणनीति बनाने में मशगूल थे.

साजिद : भाई, ये विनोद के साथ 50 लाख में मांडवली ठीक रही कि और ज़्यादा मिल सकता था?
अश्विनी : इतना तो आने दे भाया, फिर और लपेटते हैं साले को. जो 50 लाख दे सकता है, वो और भी दे सकता है.
साजिद : ये तो है, लेकिन मुर्गी कितने अंडे देगी भाई? चक्कू से काटने का कब है?
अश्विनी : रुक जा, रुक जा. इतनी जल्दी नहीं. अभी मेरी नज़र में कुछ और भी है. और डरता काहे को है भाया? हमें 7 साल हो गए ऐसे ही मुर्गियों को हलाल करते हुए. इसका भी बंदोबस्त हो जाएगा.

इधर, विनोद के 50 लाख देने के एक दो दिन बाद ही अश्विनी और साजिद ने उसे फिर डराते धमकाते हुए और रकम मांगी. अब विनोद के पास देने के लिए कुछ नहीं था. इस बार अश्विनी और साजिद ने कहा कि अगर वह और रकम नहीं दे सकता तो अपनी इनोवा कार दे. विनोद ने अपनी कार भी दे दी लेकिन अब कुछ करीबियों ने शक ज़ाहिर किया कि कोई रिश्वत में कार क्यों लेगा? इसके बाद भी और रकम का दबाव दोनों बना रहे थे. विनोद का भी माथा ठनका तो उसने शुभचिंतकों की सलाह पर पुलिस की मदद ली.

उसने पुलिस को पूरी कहानी सुनाई तो पुलिस को भी शक हुआ और फिर जाल बिछाया गया. पुलिस के कहने पर विनोद ने और रकम देने के लिए अश्विनी और साजिद को इसी महीने पिछले दिनों चारकोप स्थित अपने घर बुलाया. जैसे ही दोनों वहां पहुंचे तो पुलिस ने जिस रकम को मार्क किया था, उसके साथ दोनों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद सच सामने आना बाकी था और सच यह था कि ये दोनों यानी अश्विनी और साजिद सीबीआई अफसर नहीं थे बल्कि धोखेबाज़ ठग थे.

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नकली सीबीआई अफसर बनकर ठगी करने वाले आरोपी. लाल घेरे में मुख्य आरोपी अश्विनी शर्मा.


ये दोनों पिछले कई सालों से खुद को सीबीआई अफसर बताकर कई लोगों के साथ ठगी और ब्लैकमेलिंग कर चुके थे और इनके खिलाफ अब तक पांच मामलों में शिकायत दर्ज होना पाया गया. एक आरोपी हरियाणा का रहने वाला है जबकि दूसरा महाराष्ट्र के ही ठाणे का. दोनों मिलकर लाखों करोड़ों रुपये इसी तरह की फिरौती से ठग चुके थे.

इस कहानी में पीड़ित के वास्तविक नाम का खुलासा नहीं किया गया है लेकिन पुलिस ने यह बताया है कि कुछ साल पहले एक आरोपी ने सीबीआई के दफ्तर में किसी तरह पैठ बनाकर सीबीआई की कार्रवाई के बारे में पूरी जानकारी जुटाई थी और उसके बाद अपने साथी के साथ ठगी का यह रास्ता इख्तियार किया. अपने पैटर्न के मुताबिक इन आरोपियों ने इस केस में भी पता लगाया गया था कि पीड़ित के खिलाफ किस मामले में जांच चल रही थी.

(इनपुट : विनय दुबे, रिपोर्टर-न्यूज़18)

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