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श्रीलंका में कितने आतंकी संगठन सक्रिय

क्यों फिर सुलग रहा है श्रीलंका, कितने आतंकी संगठन हैं यहां

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श्रीलंका में लंबे समय से बौद्ध सिंहलियों और मुस्लिमों के बीच अदावत देखी जाती रही है. वहां कई तरह के चरमपंथी भी सक्रिय रहे हैं

श्रीलंका में कितने आतंकी संगठन सक्रियZoom
श्रीलंका में तनाव बना हुआ है. अंदर अंदर ये भी माना जा रहा है कि देश में धार्मिक असंतोष भी उभर रहा है
पिछले साल श्रीलंका में मुस्लिमों के खिलाफ हुए व्यापक दंगों के बाद से श्रीलंका अंदर ही अंदर सुलग रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में श्रीलंका में अगर और उग्र प्रतिक्रियाएं हों तो हैरान नहीं होना चाहिए. वैसे श्रीलंका में चार तरह के आतंकी संगठन सक्रिय हैं.

श्रीलंका 2009 में तमिल अलगाववादियों की हार के बाद हिंसा को काबू करने में कामयाब रहा था लेकिन अब हिंसा फिर वहां सिर उठाती लग रही है. श्रीलंका में चार तरह के चरमपंथी सक्रिय हैं. जिसमें इस्लामी चरमपंथी, कट्टरपंथी बौद्ध संगठन, उग्रवादी तमिल (हिंदू) समूह तो हैं ही साथ ही कुछ ऐसे हथियार बंद विपक्षी समूह का नाम भी उभर रहा है, जो प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं."

इस्लामी चरमपंथी ग्रुप के उभरने के पीछे की वजह श्रीलंका के बौद्धों और मुस्लिमों की पुरानी अदावत है. पिछले साल यहां जब जब दंगे हुए थे, तब मुस्लिमों को काफी नुकसान हुआ था. इस हिंसा के पीछे बहुसंख्यक बौद्ध सिंहलियों का नाम आया.

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मुस्लिम यहां महज दस फीसदी हैं लेकिन बौद्ध हमेशा उन पर अस्थिरता फैलाने और धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते रहे हैं.

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बौद्धों की चिंता 
बौद्ध धर्म के अनुयायियों को मन ही मन ये लगातार सताती रही है कि मुस्लिमों की आबादी एक दिन उनसे ज्यादा हो जाएगी. कई बौद्धों को यह भी डर है कि उनके अपने देश में उनकी संस्कृति नष्ट हो जाएगी. उनका देश मुस्लिम बहुल देश बन जाएगा. मध्य एशिया, शिनजियांग, अफगानिस्तान और पाकिस्तान 7वीं-11वीं शताब्दी में इस्लाम के आने से पहले बौद्ध बहुल आबादी वाले देश रहे थे. इस्लाम धर्म का उदय और बौद्ध धर्म के पतन की घटना को एक दूसरे से जोड़ा भी जाता है.

बौद्धों और मुस्लिमों में होती रहती है टक्कर
जर्मनी के ड्यूश वैले समाचार संगठन ने ब्रसेल्स स्थित साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम में दक्षिण एशिया मामलों के जानकार जीगफ्रीड ओ वोल्फ के हवाले से कहा है, मुझे नहीं लगता कि कट्टरपंथी बौद्ध संगठनों के पास इस तरह समन्वित तरीके से उच्च स्तर के हमले करने की क्षमता है. इसके अलावा, बौद्ध समूह शायद चर्चों को निशाना नहीं बनाते. इसी तरह, तमिल संगठनों का भी इस हमले के पीछे हाथ दिखाई नहीं पड़ता. मेरी राय में, जिस तरह से हमले किए गए हैं और ईस्टर के दिन चर्चों को निशाना बनाया गया है, ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय जिहादी गुट अल कायदा या फिर इस्लामिक स्टेट और उससे जुड़े संगठन करते रहे हैं."

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तमिल उग्रवाद अब करीब खत्म ही है
वैसे श्रीलंका में तमिल उग्रवाद की घटनाएं ना के बराबर हैं, लिट्टे के खत्म होने के बाद तमिल उग्रवाद संगठनों की कोई हिंसा की घटना श्रीलंका में आमतौर पर नहीं हुई है. हालांकि श्रीलंका में दर्जनों छोटे-बड़े चरमपंथी तमिल संगठन अब भी वजूद में हैं लेकिन वो अब शांत हैं और सरकार की निगाह में भी. सिंहली बहुसंख्यक तो हैं लेकिन वो सीधी टक्कर में ज्यादा यकीन रखते हैं, इसलिए वो अक्सर मुस्लिमों से भिड़ते रहे हैं. उनके भी उग्रवाद की कोई घटना नहीं मिलती. हां, अक्सर वो हिंसा के लिए सीधे सड़कों पर जरूर उतरते रहे हैं.

श्रीलंका के बौद्धों में हमेशा मुस्लिमों को लेकर एक डर रहा है. उनका कहना है कि कई बौद्ध देश अतीत में मुस्लिम बन चुके हैं


हाल के सालों में अल्पसंख्यक मुसलमानों पर कट्टरपंथी बौद्ध समूहों के छिटपुट हमले होते रहे हैं. बौद्धों को हमेशा से डर रहा है कि जिस तरह दुनिया के कई बौद्ध देश मुस्लिम बन गए, कहीं वैसा श्रीलंका में ना हो जाए.

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आईएस और अलकायदा के सक्रिय होने की आशंका
अन्य समाचार माध्यमों ने भी विश्लेषकों के जरिए कहा है कि आईएस और अल कायदा जैसे गुट दक्षिण एशिया में लगातार सक्रिय हो रहे हैं. पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तो वे खासे मजबूत रहे हैं, लेकिन अब उनसे जुड़े गुट दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में भी पांव फैला रहे हैं.

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