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क्या है अक्साई चिन का इतिहास, जिसे लेकर चीन ने फिर दिखाई दादागीरी

News18Hindi
Updated: May 19, 2020, 9:20 PM IST
क्या है अक्साई चिन का इतिहास, जिसे लेकर चीन ने फिर दिखाई दादागीरी
1950 के दशक से इस इलाके को लेकर भारत और चीन के बीच में विवाद है.

1950 के दशक से ही अक्साई चिन (Aksai Chin) का इलाका भारत और चीन में विवाद की वजह रहा है. चीन ने अक्साई चिन को जबरदस्ती हड़पा जिसका विरोध भारत लगातार करता आया है. अब एक बार फिर यहां पर तनाव की स्थिति बन गई है.

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कोरोना वायरस पर वैश्विक तीखी प्रतिक्रियाओं से बौखलाया चीन चौतरफा आक्रामक कदम उठा रहा है. तकरीबन सभी बड़े पश्चिमी देशों से झिड़की खा चुका चीन न सिर्फ आक्रामक जवाब दे रहा है बल्कि अपने आस-पास विवादित क्षेत्रों पर अधिकार की गीदड़भभकियां भी दे रहा है. कुछ दिनों पहले दक्षिणी चीन सागर के द्वीपों पर हुए विवाद के बाद अब भारत के इलाके अक्साई चिन में एक बार फिर गतिविधियां तेज कर दी हैं.

चीन के सरकारी मीडिया की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी सैनिकों ने विवादित अक्साई चिन के गलवान घाटी इलाके में भारत की रक्षा सुविधाओं के 'अवैध निर्माण' के बाद "नियंत्रण उपायों" को बढ़ा दिया है. चीन की सरकारी मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भारत पर "गलवान घाटी क्षेत्र में सीमा रेखा पार करने और चीनी क्षेत्र में प्रवेश करने" का आरोप लगाया गया है. चीन ने भारत पर क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है. दरअसल इस क्षेत्र को लेकर भारत और चीन के बीच 1950 से ही विवाद चल रहा है. चीन लगातार भारत के इलाके पर अपना अधिकार जताता रहा है.





कहां है ये इलाका और कब से है विवाद



अक्साई चिन का ये इलाका तिब्बती पठार के उत्तर-पश्चिम में है. ये कुनलुन पर्वतों के ठीक नीचे का इलाका है. अगर ऐतिहासिकता में देखा जाए तो ये इलाका भारत को मध्य एशिया से जोड़ने वाले सिल्क रूप का हिस्सा था. सैंकड़ों सालों तक ये मध्य एशिया और भारत के बीच संस्कृति, बिजनेस और भाषा को जोड़ने का माध्यम रहा है. अक्साई चिन लगभग 5,000 मीटर ऊंचाई पर स्थित एक नमक का मरुस्थल है. इसका क्षेत्रफल 42,685 वर्ग किलोमीटर है. ये इलाका निर्जन है यहां स्थाई बस्तियां नहीं हैं.

1950 के दशक से शुरू हुआ इस इलाके पर विवाद
चीन ने अक्साई चिन के इलाके पर 1950 के दशक में कब्जा कर लिया था. भारत लंबे समय तक इस मामले से अनभिज्ञ रहा. 1957 में भारत को पता चला कि इलाके में चीन ने सड़क निर्माण तक शुरू कर दिया है. भारत ने इसकी खबर मिलते ही विरोध जताया. भारत के विरोध जताने के साथ इस इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे विवाद की शुरुआत हुई. बाद में ये विवाद युद्ध में भी बदला जब चीन ने भारत पर हमला किया था. इस इलाके में बनाई गई सड़क को पहली बार चीन ने 1958 में अपने नक्शे में दिखाया था. ये भारत द्वारा जताए गए विरोध के खिलाफ चीनी दादागीरी थी.

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय से भारत इस इलाके पर चीन के कब्जे को गैरकानूनी बताता आ रहा है.


क्या है भारत का आरोप
भारत 1957 के बाद से ही अक्साई चिन पर चीन के कब्जे को गैरकानूनी बताता आया है. इस इलाके को लेकर बीते दशकों के दौरान भारत और चीन के बीच कई बार तनातनी हो चुकी है. अक्साई चिन का इलाका चीन के जिनजियांग प्रांत से जुड़ता है.

चीन अपने यहां के नक्शे में इस इलाके को जिनजियांग का इलाका बताता आया है. भारत का विरोध इसी बात से है. इसी इलाके से होकर गुजरता है जिनजियांग-तिब्बत हाइवे. कहा जाता है कि इसी सड़क की बदौलत चीन ने यहां पर अपना अधिकार जमाना शुरू किया था. 1950 के दशक के बाद से ही ये इलाका चीन के कब्जे में है. लेकिन भारत ने लगातार इस कब्जे को गैरकानूनी ठहराया है.

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First published: May 19, 2020, 8:47 PM IST
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