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येनपक कथा और अन्य कहानियां: चुस्त बुनावट और खिलते- मुरझाते जीवन की कथाएं

येनपक कथा और अन्य कहानियां: चुस्त बुनावट और खिलते- मुरझाते जीवन की कथाएं

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Yenapak Katha aur Any Kahaaniyaan: बिहार में पैदा हुई और केरल में रहने वाली महिला साहित्यकार अनामिका अनु का नया कहानी संग्रह आया है. इसकी नायिका महिलाएं हैं और वो सभी 9 रसों में अपनी कहानी कह रही हैं.

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येनपक कथा और अन्य कहानियां: चुस्त बुनावट और खिलते- मुरझाते जीवन की कथाएंZoom
‘येनपक कथा और अन्य कहानियां’. सभी कहानियों की नायिका स्त्रियां हैं.
Yenapak Katha aur Any Kahaaniyaan: केरल में रहने वाली महिला कवि, कथाकार और अनुवादक अनामिका अनु का नया कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ है, जिसमें सभी नौ रसों के रंगों को रचती-बुनती कहानियां हैं. संग्रह का नाम है ‘येनपक कथा और अन्य कहानियां’. जो मानव मन की परतों को खोलता बुनता है. इन सभी कहानियों की नायिका स्त्रियां हैं.

लेखिका कविता और कहानियां बुनती हैं. लेखिका अनामिका ने पहले कविताएं लिखनी शुरू कीं तो फिर कहानियां. इन कहानियों की लय है. मानव के कोमल मन की सतत पड़ताल. कहानियों में हर पात्र अपनी कोमलता और दृढ़ता को अपने तरीके से जाहिर करता हुआ सामने आता है. कहानियों में प्रकृति और जीवन जगत के सामान्य अवयवों की गति और स्पंदन भी है.
यथार्थ का धरातल और कल्पना की छलांग
इन कहानियों में यथार्थ का धरातल है तो कल्पना की ऊंची छलांग भी. कुछ कहानियां गांव की हैं, कुछ शहर की. वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रकाश इन कहानियों पर अपनी बात रखते हुए कहते हैं, ‘ कुछ ऐसी कथाएं हैं जिनमें किसी लोक-गाथा जैसा जादू पैदा होता है..जिसे हर रचना हासिल करना चाहती है.’ मोह-माया, आत्मा, अनुराग, विछोह, विद्रोह, नैतिकता, ऐंद्रिकता,क्लिष्टता, निष्ठुरता ,साहस, सौन्दर्य, सामंजस्य, जन्म और मृत्यु के दृश्यों से बुनी इन कहानियों में समय,समाज और सांस्कृतिक आस्था को नए संदर्भ में उद्घाटित करने की ताकत है.
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अनामिका अनु मुज़फ़्फ़रपुर में जन्मी हैं और केरल में रह रही हैं.कहानियों में लय और कविता दोनों
अनामिका अनु ने अपनी कहानियों में स्त्रियों की आकांक्षा,उनके स्वप्न,उनके संघर्ष और उनकी कामनाओं की एक अद्भुत दुनिया बड़ी कुशलता और आत्मविश्वास के साथ खड़ी की है. कहानियों में लय और कविता दोनों है.
कैसे हैं इन सारी कहानियों के रंग
इन कहानियों में सफ़ेद दाग़ से जुड़ी दक़ियानूसी असहिष्णुता से भिड़ती लड़की है. मृत पत्रकार की चिट्ठी है. थोड़े से सुख को जीती स्त्री है, अवसाद से जिरह है, फेसबुक पर गैरवाज़िब व्यवहार करता पुरुष है, उदास चित्रकार है और प्रेम को किनारे रखकर स्वयं को गढ़ती स्त्री है. रूक्ष यथार्थों को उद्घाटित करती इन कहानियों में कोमल भावनाओं, भोले विश्वासों, गहरी आस्थाओं और खुरदुरी सचाइयों को बड़े कलात्मक तरीके से पिरोया गया है.
इन कहानियों पर अपनी बात रखते हुए प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल कहते हैं, ‘ये कहानियां कोमल भावनाओं, भोले विश्वासों, गहरी आस्थाओं और खुरदुरी सच्चाइयों के बीच संवाद और आवाजाही की कहानियां हैं. ये कहानियां दरअसल मर्मस्पर्शी चित्र हैं ’
मैथिली और मलयालम शब्दों का मेल
इस किताब की एक विशेषता यह है कि इसमें लोकभाषा के सुंदर शब्दों का खूब इस्तेमाल हुआ है. कहीं पर मैथिली के शब्द हैं तो कहीं पर मलयालम के शब्दों का मेल. हिंदी के जल में मैथिली और मलयालम के शहद को सलीके से बूंद-बूंद टपकाया गया है.
इन सभी कहानियों की नायिकाएं अपनी भावनाओं से द्वंद्व करती हुई प्रतीत होती हैं. ये स्त्रियां कोमल होकर भी साहसी हैं. अधैर्य में भी धैर्य दिखाती इन स्त्रियों के आंखों में स्वप्न हैं. उनको अमली जामा पहनाने का साहस भी. ये स्त्रियां अपनी कामनाओं को व्यक्त करने में आश्चर्यजनक रूप से ईमानदार हैं.
किताब की लेखिका अनामिका मुज़फ़्फ़रपुर में जन्मी हैं और केरल में रह रही हैं. उन्हें भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (2020) समेत कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिल चुके हैं. इससे पहले उनका काव्यसंग्रह ‘इंजीकरी’ प्रकाशित हो चुका है. उनके खाते में कई किताबें हैं. अनुवादक के तौर पर भी उन्होंने काफी काम किया है. कहानी संग्रह की यह किताब मंजुल प्रकाशन से आयी है.

About the Author

Sanjay Srivastavaडिप्टी एडीटर
लेखक न्यूज18 में डिप्टी एडीटर हैं. प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का 30 सालों से ज्यादा का अनुभव. लंबे पत्रकारिता जीवन में लोकल रिपोर्टिंग से लेकर खेल पत्रकारिता का अनुभव. रिसर्च जैसे विषयों में खास...और पढ़ें
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