'चुनाव जीतने का ठिकाना नहीं लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर घमासान'
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'चुनाव जीतने का ठिकाना नहीं लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर घमासान'
कांग्रेस नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)

कांग्रेस अभी भी क्षत्रपों में बंटी हुई है और मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसे लेकर अंदरूनी घमासान मचा हुआ है. ऐसा लग रहा है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में अभी कुछ ठीक नहीं चल रहा है

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 31, 2018, 12:58 PM IST
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मध्य प्रदेश में कांग्रेस अध्य्क्ष कमलनाथ की तीन महीने की लंबी कवायद, सैकड़ों की तादाद में कमेटियों की जमावट, पांच हजार से ज्यादा छोटे बड़े नेताओं को काम पर लगाने के बावजूद ऐसा लग रहा है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में अभी कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कांग्रेस अभी भी क्षत्रपों में बंटी हुई है और मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसे लेकर अंदरूनी घमासान मचा हुआ है.

कमलनाथ और सिंधिया समर्थक मुख्यमंत्री को लेकर पोस्टर वार चला रहे हैं. वहीं अजयसिंह समर्थकों ने तो प्रभारी महासचिव के साथ धक्का-मुक्की कर उनका कुर्ता तक फाड़ दिया है. सभी गुटों के बीच समन्वय के लिए निकले दिग्विजय सिंह के प्रयास धाराशाही होते दिख रहे हैं.

रेस से बाहर बता रहे
पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं करने की अपनी परंपरा दुहाई दे रहा है. कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, सिंधिया खुद को इस रेस से बाहर बताते हुए नही थक रहे हैं, लेकिन पार्टी नेता समर्थक आपस में भिड़ रहे हैं. मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से कांग्रेस सत्ता से बेदखल है. सिर्फ 57 सीटें विधानसभा की और मात्र तीन सीटें लोकसभा की इस रेकार्ड पर कांग्रेस चुनाव मैदान में है. यानि चुनाव जीतने का कोई ठोस पता ठिकाना अभी नदारद है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसे लेकर संघर्ष चरम पर है.
पहली लड़ाई भाजपा को हराना


पार्टी के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि जो भी घटनाक्रम चल रहा है वह कांग्रेस को एक सूत्र में नहीं बांध सकता. पहली लड़ाई भाजपा को हराने की है. लेकिन देखने में आ रहा है कि जहां-जहां पार्टी नेता दौरे कर रहे हैं, वहां-वहां समर्थकों का हुजूम मुख्यमंत्री को लेकर नारेबाजी कर रहा है.

देखने में आ रहा है कि जहां-जहां पार्टी नेता दौरे कर रहे हैं, वहां-वहां समर्थकों का हुजूम मुख्यमंत्री को लेकर नारेबाजी कर रहा है


सारा खेल टिकटों का
दरअसल सारा खेल टिकटों को लेकर है. हर गुट हर नेता अपने समर्थक को टिकट का भरोसा दे रहा है. दिग्विजय सिंह समन्वय के लिए जहां भी बैठकें कर रहे हैं, वहां उन्हें चुनावी टिकट के दावेदारों से जूझ रहे हैं. वे समन्वय के लिए किसी को क्षेत्र बदलने की बात कह रहे हैं, तो किसी को दूसरी जगह से टिकट लेने के बात कह रहे हैं.

सिंधिया चुनाव अभियान समिति की बैठकों के लिए दौरे कर रहे हैं. वे जहां भी जा रहे हैं वहां आसपास के क्षेत्र के नेता टिकटों के लिए भीड़ लगा रहे हैं. कमलनाथ नेताओं को आगाह कर रहे हैं कि वे टिकट की दौड़ में भोपाल तक नहीं आए. बावजूद इसके सिंह, सिंधिया और कमलनाथ समर्थकों को उम्मीद है कि टिकट तो उनकी झोली में ही होगा.

कमलनाथ नेताओं को आगाह कर रहे हैं कि वे टिकट की दौड़ में भोपाल तक नहीं आए. बावजूद इसके सिंह, सिंधिया और कमलनाथ समर्थकों को उम्मीद है कि टिकट तो उनकी झोली में ही होगा


दो सर्वे टीम मैदान में
हालांकि मध्यप्रदेश में दो सर्वे टीम मैदान पकड़ चुकी हैं. गुजरात और कर्नाटक के नेताओं को काम पर लगाया गया है. वे एक-एक विधानसभा का सर्वे कर सीधे हाइकमान को रिपोर्ट कर रहे हैं. करीब 80 सीटों पर कांग्रेस के पास जीतने वाले उम्मीदवारी का टोटा है. पिछले पांच चुनाव से यह हारी हुई सीटे हैं.

कोषाध्यक्ष के साथ भी झूमा–झटकी
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि पार्टी अध्यक्ष कमलनाथ किसी कार्पोरेट कंपनी के सीइओ की तरह संगठन को मुस्तैद कर रहे हैं. कई कमेटियां, प्रकोष्ठों की लंबी चौड़ी फौज उन्होंने खड़ी कर संगठन में जान फूंक दी है. लेकिन कांग्रेस के अनुशासन का वे कोई तोड़ नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं. खेमे में बंटे कांग्रेसी भिड़ रहे हैं.

पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ही नहीं, पार्टी के कोषाध्यक्ष, समेत कई नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं की भिडंत हो रही है. लेकिन किसी पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. वजह साफ है कांग्रेस इस दौर में है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को खोना नहीं चाहती.

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