बेरोजगारी पर बोले PM मोदी- केंद्र ने बहुत नौकरियां दी, राज्यों के डेटा में है दिक्कत
Agency:News18Hindi
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मोदी ने कहा कि नौकरियों की कमी से ज्यादा बड़ा मुद्दा नौकरियों के डेटा की कमी होना है. विपक्ष ने स्वाभाविक रूप से अपनी पसंद की एक तस्वीर पेश करने और सरकार को दोषी ठहराने के लिए इस अवसर का फायदा उठाया है.

रोजगार के सवाल पर विपक्ष की आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बारे में राज्य सरकारों के आंकड़ों का हवाला दिया है. पीएम मोदी ने सवाल किया कि अगर राज्यों में अच्छी संख्या में रोजगार सृजित हो रहे हैं, तब केंद्र कैसे बेरोजगारी की स्थिति पैदा करेगा?
प्रधानमंत्री ने 'स्वराज मैगजीन' को दिए गए इंटरव्यू में कहा ये सवाल किए हैं. उन्होंने कहा कि नौकरियों के मुद्दे पर हमारे ऊपर उंगली उठाने के लिए वह विपक्ष को दोष नहीं देते, मगर यह बताना जरूरी है कि नौकरियों का सटीक आंकड़ा नहीं होना एक कारण है.
मोदी ने कहा कि नौकरियों की कमी से ज्यादा बड़ा मुद्दा नौकरियों के डेटा की कमी होना है. विपक्ष ने स्वाभाविक रूप से अपनी पसंद की एक तस्वीर पेश करने और सरकार को दोषी ठहराने के लिए इस अवसर का फायदा उठाया है.
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प्रधानमंत्री ने कहा, 'साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए उनकी सरकार ने चार स्तरीय रणनीति अपनाई है. इसमें लागत कम करना, उत्पादों की उचित कीमत सुनिश्चित करना, कटाई और इसके बाद नुकसान को कम करना, आय अर्जित करने के अधिक आयाम सृजित करना शामिल है.'
मोदी ने सवाल किया, ‘अगर राज्य अच्छी खासी संख्या में नौकरियां सृजित करते हैं, तब क्या ऐसा संभव है कि देश में रोजगार पैदा नहीं हो रहा हो? क्या ऐसा संभव है कि राज्यों में रोजगार पैदा हो रहा हो और केंद्र बेरोजगारी की स्थिति पैदा करे?'
उन्होंने कहा कि नई अर्थव्यवस्था में पैदा होने वाली नौकरियों के हिसाब से नौकरियां को गिनने का हमारा तरीका पुराना है. नौकरियों को मापने के सही तरीके के बारे में एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि जब हम अपने देश में रोजगार के रुझानों को देखते हैं, तो हमें यह ध्यान रखना होगा कि हमारे युवाओं की आशा..आकांक्षाएं अलग-अलग हैं. उदाहरण के लिए, देशभर में करीब तीन लाख ऐसे उद्यमी हैं, जो कॉमन सर्विस सेंटर चला रहे हैं. स्टार्ट-अप नौकरियां रोजगार सृजन में प्रोत्साहन के रूप में काम कर रही हैं.
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प्रधानमंत्री ने कहा, 'मुद्रा लघु ऋण के तहत 12 करोड़ से अधिक लोन दिए गए हैं. क्या यह उम्मीद करना गलत है कि एक लोन कम से कम एक व्यक्ति के जीवन को समर्थन करने के साधनों को जुटाने में समर्थ है? '
किसानों की आय दोगुनी करने के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि पहले किसान ऐसे तरीकों से खेती करने को मजबूर थे, जो अवैज्ञानिक तरीके थे. यूरिया के लिए लाठियों का सामना करना पड़ता था.
अब खेती को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं. प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र से कृषि में निवेश बढ़ाने की अपील की. (एजेंसी इनपुट)
प्रधानमंत्री ने 'स्वराज मैगजीन' को दिए गए इंटरव्यू में कहा ये सवाल किए हैं. उन्होंने कहा कि नौकरियों के मुद्दे पर हमारे ऊपर उंगली उठाने के लिए वह विपक्ष को दोष नहीं देते, मगर यह बताना जरूरी है कि नौकरियों का सटीक आंकड़ा नहीं होना एक कारण है.
मोदी ने कहा कि नौकरियों की कमी से ज्यादा बड़ा मुद्दा नौकरियों के डेटा की कमी होना है. विपक्ष ने स्वाभाविक रूप से अपनी पसंद की एक तस्वीर पेश करने और सरकार को दोषी ठहराने के लिए इस अवसर का फायदा उठाया है.
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प्रधानमंत्री ने कहा, 'साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए उनकी सरकार ने चार स्तरीय रणनीति अपनाई है. इसमें लागत कम करना, उत्पादों की उचित कीमत सुनिश्चित करना, कटाई और इसके बाद नुकसान को कम करना, आय अर्जित करने के अधिक आयाम सृजित करना शामिल है.'
रोजगार के बारे में एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि रोजगार सृजन के विषय पर राजनीतिक परिचर्चा में एकरूपता की कमी है. उन्होंने कहा, 'हमारे पास रोजगार के विषय पर राज्यों की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़े हैं. उदाहरण के लिए पिछली कर्नाटक सरकार ने 53 लाख नौकरियां सृजित करने का दावा किया. पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि उन्होंने पिछले कार्यकाल में 68 लाख नौकरियां सृजित की.’
मोदी ने सवाल किया, ‘अगर राज्य अच्छी खासी संख्या में नौकरियां सृजित करते हैं, तब क्या ऐसा संभव है कि देश में रोजगार पैदा नहीं हो रहा हो? क्या ऐसा संभव है कि राज्यों में रोजगार पैदा हो रहा हो और केंद्र बेरोजगारी की स्थिति पैदा करे?'
उन्होंने कहा कि नई अर्थव्यवस्था में पैदा होने वाली नौकरियों के हिसाब से नौकरियां को गिनने का हमारा तरीका पुराना है. नौकरियों को मापने के सही तरीके के बारे में एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि जब हम अपने देश में रोजगार के रुझानों को देखते हैं, तो हमें यह ध्यान रखना होगा कि हमारे युवाओं की आशा..आकांक्षाएं अलग-अलग हैं. उदाहरण के लिए, देशभर में करीब तीन लाख ऐसे उद्यमी हैं, जो कॉमन सर्विस सेंटर चला रहे हैं. स्टार्ट-अप नौकरियां रोजगार सृजन में प्रोत्साहन के रूप में काम कर रही हैं.
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उन्होंने कहा कि आज देशभर में लगभग 15,000 से अधिक स्टार्ट-अप हैं, जो हजारों युवाओं को रोजगार देते हैं, जिन्हें सरकार किसी न किसी तरह से मदद कर रही है. रोजगार के मामले में विपक्ष के आरोपों पर मोदी ने ईपीएफओ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, 'पिछले साल संगठित क्षेत्र में 70 लाख नौकरियां पैदा हुई है, जबकि अंसगठित क्षेत्र में कुल रोजगार का 80 फीसदी रोजगार पैदा हुआ है.'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'मुद्रा लघु ऋण के तहत 12 करोड़ से अधिक लोन दिए गए हैं. क्या यह उम्मीद करना गलत है कि एक लोन कम से कम एक व्यक्ति के जीवन को समर्थन करने के साधनों को जुटाने में समर्थ है? '
किसानों की आय दोगुनी करने के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि पहले किसान ऐसे तरीकों से खेती करने को मजबूर थे, जो अवैज्ञानिक तरीके थे. यूरिया के लिए लाठियों का सामना करना पड़ता था.
अब खेती को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं. प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र से कृषि में निवेश बढ़ाने की अपील की. (एजेंसी इनपुट)
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