न्यूजीलैंड में मस्जिद पर हमले का बदला हैं ईस्टर पर श्रीलंका के सीरियल ब्लास्ट!
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पूर्व राजनयिक जी. पार्थसारथी के मुताबिक, ईसाई समुदाय को निशाना बनाकर ईस्टर पर किए गए हमले के समय से साफ है कि ये न्यूजीलैंड में मस्जिद पर किए गए हमले का प्रतिशोध था.

एश्वर्य कुमार
श्रीलंका में ईसाइयों के पर्व ईस्टर पर हुए आठ धमाकों में 290 लोगों की मौत ने पूरी दुनिया को हिला दिया. भारत के पूर्व राजनयिक जी. पार्थसारथी का मानना है कि ये धमाके न्यूजीलैंड की मस्जिद में की गई हत्याओं का बदला लेने के लिए किए गए थे. आतंकियों ने उस देश को चुना, जिसमें ऐसे हमले के बारे में सोचना थोड़ा मुश्किल था. हालांकि, आतंकियों को एकसाथ इतने चर्च और विदेशी सैलानी आसानी से कहां मिल सकते थे.
पार्थसारथी ने कहा, 'बड़ी संख्या मेें श्रीलंकाई युवाओं के सीरिया या इराक जाकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल होने और प्रशिक्षण लेने का कोई सुबूत नहीं मिला है. श्रीलंका में हमलावरों के निशाने पर ईसाई समुदाय था. उन्होनें धमाकों के लिए ईस्टर का दिन चुना, जिस दिन चर्च में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं. साफ है कि हमलावरों ने न्यूजीलैंड की मस्जिद में हुए हमले का प्रतिशोध लेने के लिए ये धमाके किए.'
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पूर्व राजनयिक ने कहा कि बौद्ध धर्म से जुड़े संगठनों में इस्लाम का विरोध लगातार बढ़ रहा है. बौद्ध धर्म को मानने वाले म्यांमार और थाईलैंड में भी इस्लाम को लेकर कुछ ऐसा ही माहौल है. श्रीलंका में हमलावरों ने गिरजाघरों के साथ ही उन होटलों को निशाना बनाया, जहां ईसाई धर्म को मानने वाले स्थानीय लोगों के अलावा पश्चिमी देशों के विदेशी सैलानी बड़ी संख्या में ठहरे थे. यह सिर्फ श्रीलंका पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को दहलाने वाला हमला था.
पार्थसारथी ने कहा कि हमलावर न्यूजीलैंड की तरह ईसाइयों के पूजास्थलों को निशाना बना रहे हैं. ध्यान रहे कि बौद्ध धर्म को मानने वाले कई देशों में पहले भी ऐसे हमले हो चुके हैं, लेकिन श्रीलंका में हमले की भीषणता से साफ है कि इसमें कोई बड़ा आतंकी संगठन शामिल था. हम कह सकते हैं कि आतंकियों ने दुनिया को साफ और अहम संदेश दिया है. श्रीलंका सरकार को इस नजरिये से भी धमाकों की जांच करनी चाहिए.
यह भी पढ़ें: श्रीलंका सीरियल ब्लास्ट में तौहीद जमात पर शक, भारत के इस राज्य में है एक्टिव!
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श्रीलंका में ईसाइयों के पर्व ईस्टर पर हुए आठ धमाकों में 290 लोगों की मौत ने पूरी दुनिया को हिला दिया. भारत के पूर्व राजनयिक जी. पार्थसारथी का मानना है कि ये धमाके न्यूजीलैंड की मस्जिद में की गई हत्याओं का बदला लेने के लिए किए गए थे. आतंकियों ने उस देश को चुना, जिसमें ऐसे हमले के बारे में सोचना थोड़ा मुश्किल था. हालांकि, आतंकियों को एकसाथ इतने चर्च और विदेशी सैलानी आसानी से कहां मिल सकते थे.
पार्थसारथी ने कहा, 'बड़ी संख्या मेें श्रीलंकाई युवाओं के सीरिया या इराक जाकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल होने और प्रशिक्षण लेने का कोई सुबूत नहीं मिला है. श्रीलंका में हमलावरों के निशाने पर ईसाई समुदाय था. उन्होनें धमाकों के लिए ईस्टर का दिन चुना, जिस दिन चर्च में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं. साफ है कि हमलावरों ने न्यूजीलैंड की मस्जिद में हुए हमले का प्रतिशोध लेने के लिए ये धमाके किए.'
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पूर्व राजनयिक ने कहा कि बौद्ध धर्म से जुड़े संगठनों में इस्लाम का विरोध लगातार बढ़ रहा है. बौद्ध धर्म को मानने वाले म्यांमार और थाईलैंड में भी इस्लाम को लेकर कुछ ऐसा ही माहौल है. श्रीलंका में हमलावरों ने गिरजाघरों के साथ ही उन होटलों को निशाना बनाया, जहां ईसाई धर्म को मानने वाले स्थानीय लोगों के अलावा पश्चिमी देशों के विदेशी सैलानी बड़ी संख्या में ठहरे थे. यह सिर्फ श्रीलंका पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को दहलाने वाला हमला था.
पार्थसारथी ने कहा कि हमलावर न्यूजीलैंड की तरह ईसाइयों के पूजास्थलों को निशाना बना रहे हैं. ध्यान रहे कि बौद्ध धर्म को मानने वाले कई देशों में पहले भी ऐसे हमले हो चुके हैं, लेकिन श्रीलंका में हमले की भीषणता से साफ है कि इसमें कोई बड़ा आतंकी संगठन शामिल था. हम कह सकते हैं कि आतंकियों ने दुनिया को साफ और अहम संदेश दिया है. श्रीलंका सरकार को इस नजरिये से भी धमाकों की जांच करनी चाहिए.
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