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सपा के गढ़ बिसौली में भाजपा ने लगाई थी सेंध, क्‍या इस बार खाता खोल पाएगी बसपा?

Bisauli Assembly Seat: सपा के किले में 2017 में भाजपा ने लगाई थी सेंध, इस बार कौन दिखाएगा दम?

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Bisauli Assembly Seat: बिसौली सुरक्षित विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी का अब तक खाता नहीं खुल सका है. 3.87 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर सबसे अधिक दलित वोटर हैं. 1996 से लेकर 2012 तक इस सीट से लगातार समाजवादी पार्टी जीतती रही. 2017 में भाजपा के कुशाग्र सागर ने सपा की जीत का सिलसिला तोड़ा.

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बदायूं. बिसौली सुरक्षित विधानसभा सीट भी समाजवादी पार्टी (सपा) का गढ़ मानी जाती है. 2008 के परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. 1996 में पहली बार यहां पर सपा जीती थी, इसके बाद 2012 तक लगातार जीतती रही. 2017 के ‘मोदी लहर’ में सपा के इस किले में भी भाजपा ने सेंध लगा दिया था. उसके उम्‍मीदवार कुशाग्र सागर ने समाजवादी पार्टी के निवर्तमान विधायक आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को 10 हजार से अधिक वोटों से पराजित कर दिया था.

बिसौली विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था. पहली बार दो विधायक चुने गए थे. एक सामान्‍य और दूसरा अनुसूचित जाति से. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस सीट से चार-चार बार जीत चुकी हैं. भारतीय जनता पार्टी और चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल को दो-दो बार प्रतिनिधित्‍व का मौका मिला है. जनसंघ और जनता दल के प्रत्‍याशी भी एक-एक बार जीत चुके हैं, दो बार निर्दलीयों ने परचम फहराया था. बहुजन समाज पार्टी का अभी तक खाता नहीं खुला है.
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कुशाग्र सागर को 100287 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे समाजवादी पार्टी के आशुतोष मौर्या 89599 वोट मिले थे. 3.87 लाख मतदाताओं वाली बिसौली विधानसभा सीट पर सबसे अधिक दलित वोटर हैं, जिनकी संख्‍या करीब 85 हजार है. इसके बाद मुस्लिम हैं, जिनके 72 हजार वोटर हैं. यादव 70 हजार, मौर्य और शाक्‍य करीब 40-40 हजार वोटर हैं.
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