नए जातीय समीकरण की ओर यूपीः OBC व SC/ST आरक्षण को बांटने की तैयारी!
Agency:News18 Uttar Pradesh
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सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की सिफारिश की है. समिति ने इसके लिए तीन वर्ग पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा बनाने का प्रस्ताव दिया है.

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले यूपी में नए जातीय समीकरण की जमीन तैयार हो रही है. दरअसल यूपी में आरक्षण में बंटवारे का फ़ॉर्मूला तैयार हो चुका है. अति पिछड़ा सामाजिक न्याय समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में ओबीसी और एससी/एसटी आरक्षण कोटे में बंटवारे की सिफारिश की गई है. फिलहाल इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेना हैं.
सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की सिफारिश की है. समिति ने इसके लिए तीन वर्ग पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा बनाने का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा. यानी पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को 9-9 फ़ीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है.
ये होगा असर
समिति की रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग में 12 जातियां, 59 जातियों को अति पिछड़ा और 79 जातियां सर्वाधिक पिछड़ों की श्रेणी में रखी गई हैं. ऐसा होने पर प्रदेश में यादव, ग्वाल, सुनार, कुर्मी समेत 12 जातियां पिछड़ा वर्ग के कुल 27 प्रतिशत आरक्षण में से एक तिहाई आरक्षण पर सिमट जाएंगी. मतलब अगर पिछड़ा वर्ग की तीन श्रेणियों में 27 पदों पर भर्तियां होनी है तो पिछड़ा वर्ग में रखी गई 12 जातियों को कुल 9 पद ही मिलेंगे.
इसी तरह एससी/एसटी में भी दलित, अति दलित और महा दलित श्रेणी बनाकर इसे भी तीन हिस्से में बांटने की सिफारिश की है. 22 फ़ीसदी एससी/एसटी आरक्षण में दलित जातियों को 7%, अति दलित जातियों को 7% और महादलित जातियों को 8% आरक्षण देने की सिफारिश की गई है.
एससी/एसटी वर्ग में समिति ने 87 जातियों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. दलित वर्ग में 4, अति दलित में 37 व महादलित में 46 जातियों को शामिल करने की सिफारिश की गई है.
मुख्यमंत्री को लेना है अंतिम फैसला
अब इस मामले में फैसला मुख्यमंत्री को लेना है. रिपोर्ट उनके पास है. मामले में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अब जब समिति की रिपोर्ट आ चुकी है, तो इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए. इससे सरकार को चुनाव में लाभ ही लाभ मिलेगा. वहीं दूसरा सहयोगी अपना दल बंटवारे के पक्ष में नहीं है.
मामले में बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. मामला सरकार के पास विचाराधीन है. शुक्ला ने कहा कि यह व्यवस्था कई अन्य राज्यों में भी है. अध्ययन के बाद सरकार जो भी वंचित हैं उन्हें लाभ देने के लिए नई व्यवस्था लागू कर सकती है.
सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबका साथ सबका विकास की बात करती है. सरकार सामाजिक समरसता को लेकर कृत संकल्प है. समाज में जो भी दबे-कुचले पिछड़े और दलित हैं उनको न्याय दिलाने के लिए जो कुछ भी संभव होगा वह करेगी.
वहीं विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा चुनाव से पहले ऐसी सिफारिशों का आना यह दर्शाता है कि बीजेपी जातीय समीकरण को साधने में जुटी हुई है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संयोजक शिवपाल यादव ने आरक्षण के बंटवारे को लेकर कहा कि जिसकी जितनी हिस्सेदारी हो उसकी उतनी भागीदारी भी होनी चाहिए.
सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की सिफारिश की है. समिति ने इसके लिए तीन वर्ग पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा बनाने का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा. यानी पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को 9-9 फ़ीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है.
ये होगा असर
समिति की रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग में 12 जातियां, 59 जातियों को अति पिछड़ा और 79 जातियां सर्वाधिक पिछड़ों की श्रेणी में रखी गई हैं. ऐसा होने पर प्रदेश में यादव, ग्वाल, सुनार, कुर्मी समेत 12 जातियां पिछड़ा वर्ग के कुल 27 प्रतिशत आरक्षण में से एक तिहाई आरक्षण पर सिमट जाएंगी. मतलब अगर पिछड़ा वर्ग की तीन श्रेणियों में 27 पदों पर भर्तियां होनी है तो पिछड़ा वर्ग में रखी गई 12 जातियों को कुल 9 पद ही मिलेंगे.
इसी तरह एससी/एसटी में भी दलित, अति दलित और महा दलित श्रेणी बनाकर इसे भी तीन हिस्से में बांटने की सिफारिश की है. 22 फ़ीसदी एससी/एसटी आरक्षण में दलित जातियों को 7%, अति दलित जातियों को 7% और महादलित जातियों को 8% आरक्षण देने की सिफारिश की गई है.
एससी/एसटी वर्ग में समिति ने 87 जातियों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. दलित वर्ग में 4, अति दलित में 37 व महादलित में 46 जातियों को शामिल करने की सिफारिश की गई है.
मुख्यमंत्री को लेना है अंतिम फैसला
अब इस मामले में फैसला मुख्यमंत्री को लेना है. रिपोर्ट उनके पास है. मामले में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अब जब समिति की रिपोर्ट आ चुकी है, तो इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए. इससे सरकार को चुनाव में लाभ ही लाभ मिलेगा. वहीं दूसरा सहयोगी अपना दल बंटवारे के पक्ष में नहीं है.
मामले में बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. मामला सरकार के पास विचाराधीन है. शुक्ला ने कहा कि यह व्यवस्था कई अन्य राज्यों में भी है. अध्ययन के बाद सरकार जो भी वंचित हैं उन्हें लाभ देने के लिए नई व्यवस्था लागू कर सकती है.
सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबका साथ सबका विकास की बात करती है. सरकार सामाजिक समरसता को लेकर कृत संकल्प है. समाज में जो भी दबे-कुचले पिछड़े और दलित हैं उनको न्याय दिलाने के लिए जो कुछ भी संभव होगा वह करेगी.
वहीं विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा चुनाव से पहले ऐसी सिफारिशों का आना यह दर्शाता है कि बीजेपी जातीय समीकरण को साधने में जुटी हुई है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संयोजक शिवपाल यादव ने आरक्षण के बंटवारे को लेकर कहा कि जिसकी जितनी हिस्सेदारी हो उसकी उतनी भागीदारी भी होनी चाहिए.
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