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यूरिया और डीएपी से भी सस्ता जीवामृत, ऐसे करें घर पर तैयार

Agriculture News: यूरिया और डीएपी से भी सस्ता जीवामृत! जैविक खाद की तरह इस्तेमाल, ऐसे करें घर पर तैयार

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Jeevamrit Making Video: जीवामृत खेत में रहने वाले केंचुए और अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है और इसके बाद ये बैक्टीरिया फसल के लिए खाद तैयार करते हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है.

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श्रीनगर गढ़वाल. किसान जैविक खाद के लाभ जानते हुए अब अपने खेतों में इसका प्रयोग कर रहे हैं. रासायनिक खाद जैसे यूरिया और डीएपी किसानों को महंगे दामों पर मिलती है, वहीं शुरुआत में इनका प्रयोग करने से फसल की पैदावार अच्छी होती है, लेकिन बाद में पैदावार घट जाती है और फसलों पर रासायनिक खाद का प्रयोग भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. ऐसे में अगर किसान जैविक खेती करना चाहते हैं, तो वे घर पर जैविक खाद यानी जीवामृत बना सकते हैं. इसके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल की पैदावार भी अच्छी होती है. जीवामृत का खेतों में प्रयोग करने से किसानों का खाद का खर्च भी बचता है और जमीन की उर्वरा शक्ति में कई गुना इजाफा होता है.

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के काश्तकार राजेश मोहन काला ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि जीवामृत खेती के लिए खाद का काम करता है. जीवामृत खेत में रहने वाले केंचुए और अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम भी करता है. इसके बाद ये बैक्टीरिया फसल के लिए खाद तैयार करते हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है.

घर पर ऐसे बनाएं जीवामृत
उन्होंने घर पर जीवमृत बनाने की विधि बताते हुए कहा कि जीव अमृत घर पर आसानी से मिलने वाली चीजों से तैयार हो जाता है. इसके लिए सबसे पहले एक 200 लीटर के ड्रम की जरूरत होती है. इसमें 180 लीटर पानी भरना होता है. पानी में दो किलो बेसन, दो किलो गोबर, दो किलो गुड़ और पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी को लगभग 500 ग्राम डालना होता है और इसके बाद इसको क्लॉक वाइज घुमाना होता है. इस मिश्रण को छायादार स्थान पर लगभग पांच दिन तक रखना होता है.

इन फसलों में करें प्रयोग
राजेश मोहन काला ने आगे कहा कि पांच दिन के बाद इसको एक हजार लीटर पानी में मिलाना होता है, जिसको एक एकड़ खेत में डाल सकते हैं. इसको डायरेक्टर पौधे की जड़ों में या फिर सिंचाई के समय पानी मिलाकर डाल सकते हैं. जीवामृत का इस्तेमाल गेहूं, धान, जौ, चना, मटर, सरसों, गोभी वर्गीय फसलों और सभी फलदार पेड़ों में किया जा सकता है. इससे फसलों और फलदार पेड़ों में पैदावार बढ़ती है.

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