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गेहूं की जड़ और पत्ते हो रहे हैं खराब, तो खेत में करें इसका छिड़काव

गेहूं की जड़ और पत्ते हो रहे हैं खराब, तो खेत में करें इसका छिड़काव,जानें एक्सपर्ट की सलाह

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Wheat Disease solution: गेहूं की बुवाई को लगभग दो माह का समय हो गया है. अब गेहूँ की फसल हल्की बड़ी हो जाती है. ऐसे में रोगों का प्रकोप बड़ जाता है. गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान फुट रॉट नामक रोग हो जाता है. जिससे गेहूं की जड़ खराब होने लग जाती है. तने और जड़ पर काले और भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लग जाते हैं.इससे बचाव लिए जानें उपाय .

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श्रीनगर गढवाल. गेहूं रबी की प्रमुख फसलों में से एक है. भारत में किसान बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती करते हैं. दिसंबर माह में गेहूं की फसल अपने शुरुआती स्टेज में होती है. इस समय गेहूं की फसल में सबसे अधिक रोग लगने की संभावना रहती है. इस स्टेज में गेहूं की फसल में सबसे अधिक फुट रॉट रोग का प्रकोप देखने को मिलता है. इस रोग के चलते गेहूं के पौधे की जड़ खराब होने लगती है और पत्तियों पर काले और भूरे धब्बे पड़ने के बाद वह सूखने लगती है, जिससे किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है.

गढ़वाल विश्वविद्यालय के उद्यानिकी विभाग के कृषि एक्सपर्ट ईश्वर सिंह ने लोकल 18 को बताया कि गेहूं की बुवाई को लगभग दो माह का समय हो गया है. अब गेहूं की फसल हल्की बड़ी हो जाती है. ऐसे में रोगों का प्रकोप बड़ जाता है. गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान फुट रॉट नामक बीमारी से होता है.

ये हैं रोग के लक्षण

ईश्वर सिंह बताते हैं कि फुट रॉट के कारण गेहूं की जड़ खराब होने लग जाती है. तने और जड़ पर काले और भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लग जाते हैं. पत्तियों पर भी काले और भूरे रंग के धब्बे होने लग जाते हैं, जिससे गेहूं की फसल खराब होने लग जाती है और किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है.

ऐसे करें बचाव

गेहूं की फसल को फुट रॉट रोग से बचाने के लिए किसानों को 250 ग्राम कॉपर ऑक्सिक्लोराइड को 100 लीटर पानी में घोलकर 1 हेक्टेयर में छिड़काव करना होता है. गेहूँ की पौध पर इसको सीधे स्प्रे करना होता है. गेहूँ की पौध पर पत्तीयों से लेकर जड़ तक अच्छी तरीके से छिड़काव करना होता है, ताकि फसल पूरी तरीके से रोग मुक्त हो जाएं.

4 से 5 दिन के अंतराल में करें छिड़काव

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इस फंगीसाइड की मदद से फसल को किसी भी तरह से नुकसान नही पहुंचाता है. किसान बिना किसी चिंता के खेत में इस फंगीसाइड का छिड़काव कर सकते हैं. फसल पर इस फंगीसाइड का छिड़काव 4 से 5 दिन के अंतराल में करना होता है. किसान अगर शुरुआत में ही इसका उपचार कर लें, तो वो इस रोग से निजात पा सकते हैं और बाद में फसल को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा.

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