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सरदार पटेल क्यों नहीं बने प्रधानमंत्री? गांधी-नेहरू पर क्या बोल गए खान सर

सरदार पटेल क्यों नहीं बने प्रधानमंत्री? गांधी-नेहरू पर क्या बोल गए खान सर, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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Khan Sir News: खान सर ने ANI पॉडकास्ट में गांधी, नेहरू और पटेल पर सवालों के जवाब दिए. खान सर के जवाबों पर तीखी प्रतिक्रियाएं उभार कर आ रही हैं. कुछ यूजर्स ने उनके तर्कों को ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से प्रेरित बता रहे हैं, जबकि कुछ ने उनकी सादगी और तथ्यपरक जवाबों की तारीफ की.

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पटना: बिहार के फेमस शिक्षक और यूट्यूबर ‘खान सर’ ने हाल ही में देश की न्यूज एजेंसी ANI के साथ पॉडकास्ट किया. इस पॉडकास्ट में उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल को लेकर एक सवाल किया गया, और खान सर ने इसका जवाब दिया जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

नेहरू और गांधी पर खुल कर बोले खान सर

पॉडकास्ट में ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश ने खान सर से आज की युवा पीढ़ी द्वारा गांधी और नेहरू की आलोचना और सरदार पटेल को प्रधानमंत्री न बनाए जाने के बारे में सवाल पूछे. इन सवालों का जवाब खान सर ने दिया. अब उन जवाबों ने इतिहास और वर्तमान के बीच एक गहरी बहस को जन्म दिया है.

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गांधी और नेहरू पर क्या बोल गए खान सर 
स्मिता प्रकाश ने पूछा, ‘आजकल के बच्चे नेहरू और गांधी जी की आलोचना करते हैं, इस पर आपका क्या कहना है?” इस पर खान सर ने तीखा जवाब देते हुए कहा, ‘वही बच्चे जो आज अपने गांव के प्रधान या ठेकेदार के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते, वो उन गांधी जी के खिलाफ बोलते हैं, जिन्होंने गुलामी के दौर में अंग्रेजी हुकूमत से टक्कर ली थी.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि गांधी और नेहरू ने भारत की आजादी और राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दिया, और उनकी आलोचना करने से पहले उनके संघर्षों को समझना जरूरी है.’

सरदार पटेल प्रधानमंत्री क्यों नहीं बने?
स्मिता प्रकाश ने यह भी पूछा, ‘क्या आजादी के बाद नेहरू की जगह सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाना चाहिए था? क्या तब देश का इतिहास अलग होता?’ इस सवाल के जवाब में खान सर ने तथ्यों का हवाला देते हुए कहा, ‘पहला आम चुनाव 1951 में हुआ था, और सरदार पटेल का निधन 1950 में हो गया था. ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री बनाना संभव ही नहीं था.’ खान सर का यह जवाब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सराहा, तो कुछ ने इसे तर्कहीन बताते हुए आलोचना की. एक X यूजर ने लिखा, ‘क्या खान सर यह कहना चाहते हैं कि 1946 में गांधी जी को पता था कि पटेल का 1950 में निधन हो जाएगा?’

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हालांकि, ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, 1946 में अंतरिम सरकार के गठन के समय कांग्रेस अध्यक्ष को प्रधानमंत्री बनाए जाने का फैसला हुआ था. उस समय सरदार पटेल कांग्रेस अध्यक्ष के लिए मजबूत दावेदार थे, लेकिन महात्मा गांधी ने जवाहरलाल नेहरू का समर्थन किया. गांधी का मानना था कि नेहरू अंतरराष्ट्रीय मामलों को बेहतर समझते हैं और उनकी छवि एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण के लिए उपयुक्त थी.

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पटेल और नेहरू का रिश्ता
पॉडकास्ट में खान सर ने सीधे तौर पर पटेल और नेहरू के रिश्ते पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि दोनों नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद थे. नेहरू एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष भारत का सपना देखते थे, जबकि पटेल राष्ट्रीय हितों और हिंदू परंपराओं के प्रति अधिक झुकाव रखते थे. फिर भी, दोनों ने मिलकर भारत की एकता और अखंडता के लिए काम किया.

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Mohd Majid
with more than 4 years of experience in journalism. It has been 1 year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am covering hyperlocal news for local 18. I have also worked at ETV BHARAT (Hyderabad) as a content writer and Researcher. I Graduated in Journalism from Jamia Millia Islamia. I have mainly covered social, political, crime, motivational and innovative stories Along with business, entertainment and lifestyle. I am also interested in data journalism.
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