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टोटल इनकम है 12 लाख से कम, 60 हजार का हुआ कैपिटल गेन, टैक्‍स रिबेट मिलेगी?

टोटल इनकम है 12 लाख से कम, 60 हजार का हुआ कैपिटल गेन, टैक्‍स रिबेट मिलेगी या देना होगा पैसा?

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Tax Tips - नई टैक्स रीजीम में डिडक्शन जैसे एचआरए, एलटीए, सेक्शन 80सी, 80सीसीडी, 80जी, 80टीटीए और 80टीटीबी के तहत कोई राहत नहीं मिलती. शॉर्ट और लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन को लेकर भी नियम अलग-अलग है.

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नई दिल्‍ली. नरेंद्र मोदी सरकार ने बजट 2025 में इनकम टैक्स में बड़ा बदलाव किया और नई टैक्स रीजीम के 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स-फ्री कर दिया. यानी अगर किसी की कुल सालाना आय 12 लाख रुपये से कम है, तो कोई टैक्‍स देनदारी नहीं होगी. इसके लिए सरकार सेक्शन 87ए के तहत 60,000 रुपये तक का टैक्स रिबेट देती है. पहले की तुलना में यह रिबेट काफी ज्यादा है, क्योंकि पुरानी टैक्स रीजीम में सिर्फ 12,500 रुपये तक का ही रिबेट मिलता था. लेकिन आम लोगों के मन में यह सवाल भी है कि अगर उनकी आय में कैपिटल गेंस यानी शेयरों या म्यूचुअल फंड्स से होने वाला मुनाफा भी शामिल हो, तो क्या उन्हें यह रिबेट मिल पाएगा या फिर उन्‍हें केपिटल गेन पर टैक्‍स चुकाना होगा?

नई रिजीम में ज्यादा टैक्स छूट दी गई है.

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मान लीजिए किसी व्यक्ति की नॉर्मल इनकम 12 लाख रुपये से कम है. लेकिन उसे शेयर बाजार में ट्रेडिंग से 60,000 रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस हो गया और साथ ही 1 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस भी मिला. ऐसे में दुविधा यह होती है कि क्या इस स्थिति में भी सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाला टैक्स रिबेट लागू होगा या नहीं.

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एक्‍सपर्ट की राय

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स विशेषज्ञ बलवंत जैन का कहना है कि धारा 115बीएसी के तहत नई टैक्‍स रिजीम में इंडिविजुअल टैक्सपेयर, एचयूएफ और एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स को कम दर पर कर चुकाना होता है. लेकिन इसके साथ ही एक शर्त भी जुड़ी है. नई टैक्स रीजीम में डिडक्शन जैसे एचआरए, एलटीए, सेक्शन 80सी, 80सीसीडी, 80जी, 80टीटीए और 80टीटीबी के तहत कोई राहत नहीं मिलती.

अब बात आती है कैपिटल गेंस की. जैन बताते हैं कि नई रीजीम में अगर किसी व्यक्ति की कुल इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है, तो उसे सेक्शन 87ए के तहत 60,000 रुपये तक का टैक्स रिबेट मिल सकता है. लेकिन यह रिबेट सिर्फ नॉर्मल इनकम पर लागू होता है. कैपिटल गेंस जैसी इनकम, जिन्हें स्पेशल टैक्स रेट्स के तहत टैक्स किया जाता है, उन्हें इस रिबेट की गणना में शामिल नहीं किया जाता. यानी रिबेट यह देखने पर मिलता है कि आपकी नॉर्मल इनकम कितनी है, न कि कैपिटल गेंस समेत कुल इनकम कितनी है.

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देना होगा टैक्‍स

जैन का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की नॉर्मल इनकम 12 लाख रुपये से कम है, तो उसे इस हिस्से पर लगने वाला टैक्स पूरी तरह रिबेट के जरिए माफ हो सकता है. लेकिन स्पेशल रेट वाले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर रिबेट लागू नहीं होता. इस पर आपको रेट के हिसाब से टैक्स देना ह होगा. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी को 60,000 रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस हुआ है, तो इस पर उसे 20 फीसदी की दर से टैक्स देना पड़ेगा. सेस अलग से जोड़ा जाएगा.

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लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्‍स

जैन के अनुसार, सेक्शन 112ए के तहत लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से होने वाले 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर कोई टैक्स नहीं लगता. इसलिए अगर किसी टैक्सपेयर को 1 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस हुआ है, तो उस पर उसे कोई टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कुल मिलाकर, टैक्सपेयर को सिर्फ अपने शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स देना होगा.

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