IAS Story: कौन हैं निरंजन दास, प्रमोशन पाकर बने थे आईएएस, अब शराब घोटाले में हो गए गिरफ्तार
IAS Story: छत्तीसगढ़ के एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अरेस्ट हो गए हैं जिसके बाद वह सुर्खियों में हैं. ईडी ने इस अधिकारी को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया है. उन पर 18 करोड़ रुपये की अवैध कमाई के आरोप लगे हैं. आइए आपको बताते हैं कि ये आईएएस अधिकारी कौन हैं और क्यों चर्चा में हैं?
IAS Story: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है. रिटायर्ड आईएएस अधिकारी निरंजन दास को रायपुर में गिरफ्तार किया गया. ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत हिरासत में लिया है और कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड भी दे दी.आइए जानते हैं कि आखिर आईएएस निरंजन दास हैं कौन? वह कब और कैसे आईएएस बने थे?
Retired IAS Niranjan das biography: तो आपको बता दें कि निरंजन दास मूल रूप से छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे जिन्हें प्रमोशन मिलकर आईएएस बनाया गया. उन्होंने गरियाबंद सहित कई जिलों में कलेक्टर के रूप में काम किया. 2019 में पहली बार आबकारी आयुक्त बने. निरंजन दास इसी साल रिटायर हुए लेकिन 31 जनवरी को रिटायरमेंट के बाद 1 फरवरी से संविदा पर फिर आबकारी आयुक्त, नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी, स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन के एमडी, वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव और आईटी विभाग के सचिव की जिम्मेदारी दे दी गई. रिटायरमेंट से पहले भी उनके पास यही विभाग थे.
क्या है IAS निरंजन दास पर आरोप?
ईडी ने आईएएस निरंजन दास पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.ईडी का दावा है कि निरंजन दास ने इस घोटाले से करीब 18 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की.आरोप है कि वे शराब सिंडिकेट के सक्रिय साथी थे और घोटाले को आसान बनाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका थी.ईडी का दावा है कि डिजिटल रिकॉर्ड, जब्त दस्तावेज और गवाहों के बयानों से ये बातें साबित हो रही हैं.
हर महीने मिलते थे 50 लाख रुपये
आरोप है कि आबकारी आयुक्त रहते हुए निरंजन दास ने अपने कर्तव्यों को नजरअंदाज किया. उन्होंने सिंडिकेट को खुली छूट दी और बदले में हर महीने 50 लाख रुपये की रिश्वत ली. फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध और बिना हिसाब की शराब की बिक्री बढ़ाओ.
घोटाले का पैमाना कितना बड़ा?
यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच चला जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी. हर शराब की बोतल से अवैध वसूली होती थी.राज्य को 2500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ जबकि कुछ अनुमानों में यह आंकड़ा 3500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. पैसे को रियल एस्टेट जैसी जगहों पर निवेश किया गया.
निरंजन को क्यों दी गई थी खास जिम्मेदारी?
ईडी का आरोप है कि निरंजन दास को आबकारी आयुक्त और विभाग का सचिव का अतिरिक्त चार्ज सिर्फ घोटाला चलाने के लिए दिया गया था.रिटायरमेंट के ठीक बाद भी उन्हें संविदा पर यही जिम्मेदारियां सौंपी गईं.
मामले में और कौन-कौन गिरफ्तार?
निरंजन दास के अलावा कई बड़े नाम पहले ही पकड़े जा चुके हैं. इनमें पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और सौम्या चौरसिया शामिल हैं.एसीबी/ईओडब्ल्यू के नए आरोपपत्र में चैतन्य बघेल पर 200 से 250 करोड़ रुपये लेने का दावा किया गया है. उन्हें 3000 करोड़ से ज्यादा के मामले में आरोपी बनाया गया है.ईडी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं. यह मामला राज्य की पुरानी सरकार के कई बड़े लोगों को कठघरे में ला रहा है.