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आम आदमी पार्टी ने आदिवासी युवक को घोषित किया अपना भावी सीएम

आम आदमी पार्टी ने आदिवासी युवक को घोषित किया अपना भावी सीएम

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कांकेर में भानुप्रतापपुर के रहने वाले कोमल हुपेंडी को 'आप' पार्टी ने अपना सीएम प्रत्याशी बनाया है. आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी गोपाल राय का कहना है कि प्रदेश में बदलाव की बयार है.

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छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी ने एक आदिवासी युवक को अपना भावी सीएम घोषित कर दिया है. कांकेर में भानुप्रतापपुर के रहने वाले कोमल हुपेंडी को 'आप' पार्टी ने अपना सीएम प्रत्याशी बनाया है. आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी गोपाल राय का कहना है कि प्रदेश में बदलाव की बयार है.

आम आदमी पार्टी ने आदिवासी युवक को घोषित किया अपना भावी सीएम


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उनका कहना है कि आदिवासियों के हितों की हमेशा उपेक्षा हुई है. यही वजह है कि सहकारिता विस्तार अधिकारी रहे आदिवासी युवा कोमल हुपेंडी को आम आदमी पार्टी ने अपना सीएम उम्मीदवार बनाया है. आपको बता दें कि कोमल हुपेंडी ने साल 2016 में अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी को ज्वाइन कर लिया था.


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वहीं इस संबंध में कोमल हुपेंडी का कहना है कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर वे युवाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा नौकरी के अवसर उपलब्ध कराएंगे. प्रदेश में हमेशा से ही युवाओं की उपेक्षा हुई है, चाहे वो कोई सी भी सरकार हो, लेकिन अब उनकी सरकार बनने पर वे युवा और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए ही काम करेंगे.


 


कोमल हुपेंडी का जीवन परिचय


छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के सबसे कम उम्र के युवा दावेदार 37 वर्षीय कोमल हुपेंडी का जन्म 8 मई 1981 उत्तर बस्तर के जिला कांकेर के गांव मुंगवाल के एक आदिवासी परिवार में हुआ है. उनकी प्राथमिक शिक्षा ग्राम वुदेली एवं 12वीं पास हायर सेकेंडरी स्कूल भानुप्रतापपुर से हुई है. बीए भानुप्रताप देव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कांकेर से किया और उसके बाद द्वारका प्रसाद बिप्र महाविद्यालय बिलासपुर से इतिहास में एमए किया.


इसके बाद CGPSC (छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग) 2005 बैच में सहकारिता विस्तार अधिकारी के पद पर चयनित हुए. छत्तीसगढ़ के लिए कुछ कर गुजर की चाह में अगस्त 2016 में सहकारिता विस्तार अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया और आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली. हुपेंडी ने दो किताबें आदिवासियों पर लिखी हैं. साल 2008 में गढ़बांसला (एक अनसुलझा अतित) आदिवासी देवी देवताओं पर उल्लेखित है, वहीं दूसरी किताब साल 2012 में (लिंगो ना डाका) लिखी है (आदिवासियों की संस्कृति पर आधारित है) और उनकी तीसरी किताब में कविता संग्रह है.


 


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