छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की मनी ट्रेल उजागर, ईडी का दावा, सौम्या को मिले 115 करोड़
छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में ED ने बड़ा खुलासा किया है. एजेंसी के मुताबिक सौम्या चौरसिया शराब घोटाला गिरोह की सक्रिय सदस्य थीं और उन्हें 115 करोड़ रुपये मिले. डिजिटल साक्ष्यों से अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को और धार देते हुए बड़ा खुलासा किया है. ईडी ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की करीबी मानी जाने वाली अधिकारी सौम्या चौरसिया शराब घोटाला गिरोह की सक्रिय सदस्य थीं. एजेंसी के मुताबिक सौम्या चौरसिया को इस घोटाले के जरिए करीब 115 करोड़ रुपये की अवैध रकम मिली. डिजिटल रिकॉर्ड और जब्त सामग्री के आधार पर यह खुलासा किया गया है.
ईडी का कहना है कि सौम्या चौरसिया केवल एक सरकारी अधिकारी नहीं थीं, बल्कि घोटाले से जुड़े प्रमुख लोगों के बीच केंद्रीय समन्वयक और मध्यस्थ की भूमिका निभा रही थीं. जांच एजेंसी के अनुसार उनके जरिए सिंडिकेट के निर्देश नीचे तक पहुंचते थे और कमीशन सिस्टम को संचालित किया जाता था. इस खुलासे के बाद शराब घोटाले की जांच सीधे सत्ता के केंद्र तक पहुंचती नजर आ रही है.
ईडी की जांच में क्या सामने आया
ईडी के मुताबिक जांच के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं. इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं. इन्हीं रिकॉर्ड्स से यह सामने आया कि सौम्या चौरसिया गिरोह के शीर्ष सदस्यों के संपर्क में लगातार बनी हुई थीं. जांच एजेंसी का दावा है कि सौम्या चौरसिया अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल सहित अन्य प्रमुख आरोपियों के बीच कड़ी के रूप में काम कर रही थीं. उनके माध्यम से निर्देश, भुगतान और फैसले आगे बढ़ाए जाते थे.
115 करोड़ रुपये मिलने का दावा
ईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट में दावा किया है कि सौम्या चौरसिया को शराब घोटाले के नेटवर्क से करीब 115 करोड़ रुपये मिले. यह रकम अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर की गई.
ईडी के प्रमुख आरोप
- सौम्या को अवैध कमीशन का बड़ा हिस्सा.
- डिजिटल ट्रेल से पैसों की पुष्टि.
- सिंडिकेट के फैसलों में सीधी भूमिका.
- अफसरों और कारोबारियों के बीच मध्यस्थ.
- सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
बुधवार को कोर्ट में पेशी, रिमांड की तैयारी
दरअसल ईडी ने सौम्या चौरसिया को बुधवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया था. एजेंसी ने शराब घोटाले के नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच को लेकर पूछताछ की है. ईडी अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है. कई और नाम, लेन-देन और दस्तावेज सामने आ सकते हैं.
रायपुर ईडी ऑफिस में हुई लंबी पूछताछ
इससे पहले मंगलवार को ईडी ने सौम्या चौरसिया को रायपुर स्थित अपने कार्यालय में समन जारी कर बुलाया था. सुबह शुरू हुई पूछताछ करीब सात घंटे तक चली. पूछताछ के दौरान शराब कारोबार, कमीशन नेटवर्क और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवाल पूछे गए थे. सूत्रों के मुताबिक सौम्या चौरसिया से डिजिटल सबूतों के आधार पर जवाब मांगे गए. पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. एजेंसी का कहना है कि गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई.
पहले भी घोटालों में रही हैं आरोपी
यह पहला मौका नहीं है जब सौम्या चौरसिया किसी बड़े मामले में गिरफ्तार हुई हों. इससे पहले वह कोल लेवी और DMF घोटाले में जेल जा चुकी हैं. उस मामले में उन्हें हाल ही में जमानत मिली थी. ईडी का मानना है कि अलग-अलग घोटालों के बीच आपसी कनेक्शन हो सकता है. इसी एंगल से अब जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
ACB और EOW की FIR पर भी ईडी की जांच
ईडी ने ACB और EOW द्वारा दर्ज FIR के आधार पर भी अपनी जांच शुरू कर दी है. एजेंसी का कहना है कि राज्य एजेंसियों की जांच में सामने आए तथ्यों को मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से परखा जा रहा है.
राजनीतिक हलचल तेज
ईडी के खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष ने इसे पूर्व भूपेश सरकार के भ्रष्टाचार का प्रमाण बताया है. वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है. हालांकि ईडी का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह सबूतों और कानून के दायरे में की गई है. अब सबकी नजर कोर्ट की कार्यवाही और ईडी रिमांड पर टिकी है. माना जा रहा है कि पूछताछ में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. शराब घोटाले की जांच आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है.