ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थी माता अहिल्या, श्री राम ने इस जगह दिलाई थी मुक्ति, लाखों की संख्या में आते हैं भक्त
मंदिर के मुख्य पुजारी बृजभूषण ठाकुर बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना साल 1765 ई में दरभंगा महाराज के द्वारा की गई थी. यह मंदिर महाराज के द्वारा मां अहिल्या के लिए बनाया गया था.
अभिनव कुमार/दरभंगा. अभी भारत देश राममय है. वो धरती धन्य हो गई जहां प्रभु श्रीराम के पावन पैर पड़े थे. इसमें से एक है मिथिला की धरती. मिथिला के दरभंगा में प्रभु श्रीराम ने माता अहिल्या को श्राप मुक्त किया था. मिथिलांचल का मुख्य केंद्र कहां जाने वाला दरभंगा जिला है. यहां अहिल्या स्थान है. जहां प्रभु श्री राम आए थे. रामलला अपने गुरु के साथ जनकपुर धनुष यज्ञ में जा रहे थे. इसी क्रम में उनका आगमन इस अहिल्या नगरी में हुआ था. जहां गौतम ऋषि के श्राप से माता अहिल्या पत्थर की बनी हुई थी. जिसे प्रभु श्रीराम के चरण स्पर्श से उद्धार किया गया था. यहां पर प्रभु श्रीराम का मंदिर भी है. जिसको दरभंगा महाराज ने बनवाया था. लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी रोचक है.
मंदिर के मुख्य पुजारी बृजभूषण ठाकुर बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना साल 1765 ई में दरभंगा महाराज के द्वारा की गई थी. यह मंदिर महाराज के द्वारा मां अहिल्या के लिए बनाया गया था. लेकिन जब मां अहिल्या की यहां प्राण प्रतिष्ठा होने वाली थी, तभी महाराज के स्वप्न में मां अहिल्या आती हैं और बोलती हैं, हे राजन हम तो यहां जन्म-जन्म से पत्थर के बने हुए थे, इसलिए अब पत्थर में मत डालो. यहां उनकी स्थापना करो जिन्होंने मेरा उद्धार किया है. तब जाकर महाराज के द्वारा यहां मां जानकी, प्रभु श्री राम के साथ भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई. साथ में गौतम ऋषि और माता अहिल्या भी इस मंदिर में स्थापित है. रामायण सर्किट से भी अब इन क्षेत्रों को जोड़ने का प्लान बन रहा है.
लाखों की सख्या में आते हैं भक्त
वहीं, यहां के न्यास समिति के अध्यक्ष बालेश्वर ठाकुर और ग्रामीण पूर्व सैनिक उमेश ठाकुर बताते हैं कि यह अपने आप में गौरवशाली जगह है. यहां प्राचीन मंदिर स्थापित है. यहां दो बार मेला लगता है. चैत्र रामनवमी और विवाह पंचमी के मेले में यहां लाखों की संख्या में भक्त आते हैं. हजारों की संख्या में तो रोजाना यहां भक्तों का आना होता है, क्योंकि सच्चे दिल से मांगने पर यहां सबकी मनोकामना पूरी होती है.
