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हरदीप सिंह निज्‍जर प्लंबर से कैसे बना आतंकवादी, 10 लाख रुपये का इनाम था घोषित

हरदीप सिंह निज्‍जर कैसे प्लंबर से बना आतंकी, बब्‍बर खालसा को फिर करना चाहता था जिंदा

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Hardeep Singh Nijjar - खालिस्‍तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्‍जर भारत सरकार की शीर्ष 40 आतंकवादियों की सूची में शामिल था. भारत सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था. उसकी कनाडा में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. हरदीप सिंह आतंकी बनने से पहले एक प्‍लंबर था.

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Khalistani Terrorist Hardeep Singh Nijjar: खालिस्‍तान टाइगर फोर्स के सरगना हरदीप सिंह निज्‍जर की कनाडा में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. गुरुनानक गुरुद्वारा के बाहर खालिस्‍तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्‍जर की हत्‍या के बाद हमलावर मौके से फरार हो गया. हरदीप सिंह लंबे समय से भारत विरोधी और हिंसक गतिविधियों में शामिल था. भारत सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था. वह लगातार पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में था. निज्‍जर ने कनाडा में भारतीय दूतावास पर हमला करने के अलावा कई मंदिरों पर भी हमला किया था.

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर ने कनाडा में शुरुआती दौर में प्लंबर का काम भी किया था.

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भारत सरकार की शीर्ष 40 आतंकियों की सूची में हरदीप सिंह निज्‍जर का नाम भी था. लिहाजा, भारत सरकार ने कनाडा से उसके खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह भी किया था. बता दें कि निज्जर पंजाब के जालंधर जिले का था. बताया जाता है कि निज्‍जर ने कनाडा में प्लंबर का काम किया था. लेकिन, उसने खुद को कनाडा के सिख समुदाय के बीच खुद को एक नेता के तौर पर स्‍थापित कर लिया. नतीजा ये निकला कि उसे ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गुरुनानक गुरुद्वारा का प्रमुख चुना गया. इसके बाद वह आईएसआई के इशारे पर कनाडा में भारत विरोधी हरकतों को अंजाम देने लगा. कनाडा के कई हिंदू मंदिरों पर हमले की साजिश में उसका नाम आया था.

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आईएसआई से थे निज्‍जर के करीबी संबंध
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर करीब 10 साल पहले पाकिस्तान भी गया था. यात्रा का खर्च आईएसआई ने उठाया था. इससे साफ होता है कि निज्‍जर के पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी से काफी करीबी संबंध थे. पाकिस्‍तान में वह खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह तारा से भी मिला था. बता दें कि जगतार सिंह तारा को 2015 में थाइलैंड से पकड़ा गया था. निज्जर ने दिसंबर 2015 में ब्रिटिश कोलंबिया के मिसजेन हिल्स में खालिस्तानी आतंकियों के लिए प्रशिक्षण शिविर भी लगाया था. कैंप में उसने खालिस्तान समर्थक आतंकियों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी दिया.

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर करीब 10 साल पहले पाकिस्तान भी गया था.

क्‍या था हरदीप सिंह का असल मकसद?
आतंकवादी हरदीप सिंह निज्‍जर ने कनाडा में रह रहे मनदीप सिंह के साथ मिलकर बब्‍बर खालसा इंटरनेशनल के लिए फंड इकट्ठा किया था. दरअसल, वह खालिस्‍तानी आतंकी संगठन बब्‍बर खालसा को दोबारा जिंदा करने की कोशिश कर रहा था. वह चाहता था कि एक बार फिर अलग खालिस्‍तान देश का समर्थन करने वाले संगठन एकजुट हो सकें. बब्‍बर खालसा के अलावा वह दूसरे खालिस्‍तान समर्थक संगठनों के साथ भी मिलकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहा था. इससे उसकी पकड़ दूसरे संगठनों पर भी लगातार मजबूत होती जा रही थी.

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क्‍यों घोषित किया 10 लाख का इनाम?
भारत विरोधी गतिविधियों में लगातार शामिल रहने और खालिस्‍तान समर्थक संगठनों को फिर से जिंदा करने की कोशिशों को देखते हुए भारत सरकार ने हरदीप सिंह निज्‍जर को अपनी 40 शीर्ष आतंकियों की सूची में शामिल कर लिया था. इसके बाद उस पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था. दरअसल, हरदीप सिंह निज्जर पर जालंधर में साल 2022 में एक हिंदू पुजारी की हत्या की साजिश रचने का आरोप था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस मामले की जांच कर रही थी. एनआईए ने हरदीप सिंह पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था.

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एनआईए ने हरदीप सिंह पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था. (Image: Twitter)

प्रतिबंधित संगठन एसएफजे से भी जुड़ा था
हरदीप सिंह निज्‍जर ने ब्रैम्पटन में खालिस्तान जनमत संग्रह के आयोजन में भी अहम भूमिका निभाई थी. निज्जर ऑस्ट्रेलिया जाकर भी खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान में हिस्सा ले चुका था. उसे भारत के खिलाफ जहर उगलने में माहिर माना जाता था. हरदीप सिंह निज्जर प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस से भी जुड़ा हुआ था. इस संगठन पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था. यही नहीं, भारत ने कनाडा से सिख फॉर जस्टिस संगठन पर कार्रवाई का आग्रह भी किया था.

About the Author

Amrit Chandra
1999 से फ्रीलांस और 2004 से मेनस्‍ट्रीम मीडिया में सक्रिय हैं. ऑल इंडिया रेडियो और प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले तीन साल से ज्‍यादा समय से News18Hindi में बतौर Associate Editor कार्यरत हैं. पिछले एक साल से बिजनेस, ऑटो और मोबाइल-टेक सेगमेंट्स की जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. बिज़नेस, राजनीति, स्‍पोर्ट्स के साथ ही रिसर्च बेस्‍ड स्‍टोरीज पर अच्छी पकड़ है. News18 Hindi से पहले अमर उजाला में सेंट्रल डेस्‍क हेड, दैनिक भास्‍कर डिजिटल में रिसर्च एडिटर, दैनिक जागरण में सेंट्रल डेस्‍क, बिजनेस डेस्‍क व स्‍पोर्ट्स डेस्‍क, बिजनेस भास्‍कर में पर्सनल फाइनेंस डेस्‍क हेड, आज समाज में बिजनेस एडिटर के साथ दिल्‍ली मेट्रो एडिटर, दैनिक भास्‍कर चंडीगढ़ में सिटी डेस्‍क हेड के साथ पंचकूला भास्‍कर इंचार्ज व संडे एडिटर की जिम्‍मेदारी संभाली. इसके अलावा आइडिएशन सेल के हेड के तौर पर भी काम किया. इससे पहले अमर उजाला कानपुर में बिजनेस, इंडस्‍ट्री रिपोर्टर के साथ ही बसपा बीट पर भी काम किया. इससे पहले देहरादून में भी बतौर रिपोर्टर काम किया. इसके पहले कुछ समय ज़ी न्‍यूज चैनल में भी काम किया. शुरुआत फ्रीलांस जर्नलिस्‍ट के तौर पर की. इस दौरान ऑल इंडिया रेडियो, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक आज, जनसत्‍ता के लिए लिखा.
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