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क्या है एशिया शिखर सम्मेलन और 18 देश एक मंच से क्या लेते हैं निर्णय? जानें...

G.K: क्या है एशिया शिखर सम्मेलन और 18 देश एक मंच से क्या लेते हैं निर्णय? UPSC/BPSC अभ्यर्थियों को समझना जरूरी....

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Asia Summit: नालंदा विश्वविद्यालय में 19 सितंबर तक पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन EAS आयोजित हो रहा है जिसमें 18 देश शिक्षा, शोध, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण पर चर्चा करेंगे.

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नालंदा: देखिए अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय में आज से 19 सितंबर तक पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) का आयोजन हो रहा है. इस सम्मेलन में शिक्षा, शोध, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. जो UPSC और BPSC जैसे परीक्षार्थियों के लिए यह जानना जरूरी है कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन है क्या? और इसमें 18 देश मिलकर किस तरह के फैसले लेते हैं. आपको बता दें कि EAS की स्थापना साल 2005 में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) के नेतृत्व वाली पहल के रूप में की गई थी. हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने लाओ पीडीआर के वियनतियाने में 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) में भाग लिया. इसके बाद नालंदा को लेकर चर्चा हुई थीं.

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आपको बता दें कि इसका पहला शिखर सम्मेलन 14 दिसंबर 2005 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित किया गया था. EAS हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एकमात्र नेतृत्वकारी मंच हैं जो सामरिक महत्व के राजनीतिक, सुरक्षात्मक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सभी प्रमुख साझेदारों को एक साथ लाता है. पूर्वी एशिया समूह का विचार पहली बार साल 1991 में मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद द्वारा प्रस्तावित किया गया था. इसका उद्देश्य EAS खुलेपन, समावेशिता, अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान, आसियान की केंद्रीयता और प्रेरक शक्ति के रूप में आसियान की भूमिका के सिद्धांतों पर आधारित है. इसमें 10 आसियान देश (इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार, लाओस, कंबोडिया, ब्रुनेई और फिलीपींस) शामिल हैं. इनके अलावा 8 अन्य देश (भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और रूस) भी सदस्य हैं.
कुल मिलाकर यह 18 देशों का रणनीतिक मंच है.

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18 देश मिलकर क्या निर्णय लेते हैं?
सम्मेलन का मकसद साझा मुद्दों पर सहयोग को बढ़ाना है. इनमें शामिल हैं.
क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करना
आर्थिक साझेदारी और व्यापार को बढ़ावा देना.
ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर काम करना.
आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य संकट से मिलकर निपटना.

नालंदा सम्मेलन क्यों अहम है?
यह आयोजन भारत की Act East Policy का हिस्सा है.
भारत यहां Mission LiFE (Lifestyle for Environment) को बढ़ावा दे रहा है.
शिक्षा और शोध को साझा करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत जीवन शैली को अपनाने पर फोकस होगा.
नालंदा विश्वविद्यालय से दुनिया को भारत का सॉफ्ट पावर और ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा दिखाने का मौका मिलेगा.

UPSC/BPSC अभ्यर्थियों के लिए क्यों जरूरी?
1. यह भारत की विदेश नीति और Indo-Pacific रणनीति से जुड़ा टॉपिक है.
2. IR (International Relations) और Environment & Ecology सेक्शन में प्रश्न सीधे पूछे जा सकते हैं.
3. यह भारत की कूटनीतिक नेतृत्वकारी भूमिका और चीन के प्रभाव के संतुलन से जुड़ा पहलू है.
4. शिक्षा और शोध सहयोग भारत के सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का उदाहरण है.

About the Author

Mohd Majid
with more than 4 years of experience in journalism. It has been 1 year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am covering hyperlocal news for local 18. I have also worked at ETV BHARAT (Hyderabad) as a content writer and Researcher. I Graduated in Journalism from Jamia Millia Islamia. I have mainly covered social, political, crime, motivational and innovative stories Along with business, entertainment and lifestyle. I am also interested in data journalism.
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