मंजरी चतुर्वेदी ने 'कव्वाली दी कॉल ऑफ हार्ट्स इन लव' से इतिहास खोदकर निकाला, कहानियां सहेजीं, अनसुनी कव्वालियां सामने लाईं
जानी मानी कथक डांसर मंजरी चतुर्वेदी ने सूफी कथक का भी ईजाद किया है. हाल में ही उनकी एक किताब 'कव्वाली-दी कॉल ऑफ हार्ट्स इन लव' का विमोचन किया गया. सूफीज्म की इस पुरानी संगीत परंपरा पर उनकी इस किताब की कला क्षेत्र से जुड़े लोगों ने खुल कर सराहना की.
इबादत ही जब इश्क बन जाती है तो कुछ भी अनजाना नहीं रहता. इस दुनिया में, और दूसरी दुनिया में भी, सब कुछ, मिल जाता है. परत दर परत सारे परदे हट जाते हैं. दीन को लेकर और दुनिया को भी लेकर, सब रोशन हो उठता है. लौ लग जाती है. मालिक से और मालिक की बनाई सारी कायनात से. यही तो सूफीज्म है. सूफीज्म की इस मंजिल की तमाम सीढ़ियों में कव्वाली का अपना अलग मुकाम है. शायद यही वजह है कि सूफी संतों की दरगाहों में कव्वाली खूब फूली-फली.
हालांकि दरगाहों के दयार से निकल कर कव्वाली ने हिंदुस्तानी लोक में अपनी अलग ही जगह कायम कर ली. इसका अपना विस्तार सिंध से लेकर कश्मीर और दक्कन तक देखा जा सकता है. कव्वाली की तान, गमक और उर्जा बिखेर रही लयबद्ध तालियां पीढ़ियों से हिंदुस्तान और आज के पाकिस्तान के लोगों को झूमने पर मजबूर कर देती रही है. एक बड़ा वर्ग है जो कव्वाली के लिए तमाम रात अपनी नींद कुर्बान कर जमा रहता है.
कव्वाली की इस यात्रा को एकेडेमिक और व्यावहारिक तरीके से एक जगह लाने का काम किया है सूफी कथक इजाद करने वाली मंजरी चतुर्वेदी ने. उनकी किताब ‘कव्वाली -दी कॉल ऑफ हार्ट्स इन लव’ का विमोचन दिल्ली के इंडिया हैबीटेट सेंटर में किया गया. कथक नृत्य में अहम मुकाम रखने वाली मंजरी की किताब के विमोचन में राजधानी के हर वर्ग के दिग्गज शामिल हुए और उनकी किताब की तारीफ की.
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल और मशहूर फिल्मकार राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने किया.
किताब की भूमिका मशहूर फिल्मकार मुजफ्फर अली ने लिखी है. किताब पर टिप्पणी करते हुए मशहूर सूफी गायक हंसराज हंस लिखते हैं – “क़व्वाली की शुरुआत अमीर ख़ुसरो साहब ने की. निज़ामुद्दीन औलिया के सबसे प्यारे शागिर्द.लेकिन पंजाब आकर यह फली-फूली, परिपक्व हुई, चरम पर पहुँची. इतनी बड़ी विरासत थी,पर इसे किताब या दस्तावेज़ का रूप देने का काम किसी ने नहीं किया. तब आईं मंजरी चतुर्वेदी- सूफ़ी नृत्य की पहली रचयिता.दुनिया भर में मशहूर. उन्होंने पंजाब के क़व्वालों को मंच दिया और अब यह ख़ूबसूरत किताब लिखी। भारत की सैकड़ों साल पुरानी सूफ़ी कविता, क़व्वाली, सिंध की परंपराएँ-सब कुछ शोध के साथ सहेज दिया. क़व्वाल खुद नहीं लिख सकते, इसलिए यह काम इतिहास के लिए ज़रूरी था.
विमोचन कार्यक्रम में एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ समेत अपने क्षेत्रों के कई मशहूर लोगों ने शिरकत की.
विज्ञापन गुरु प्रहलाद कक्कड़ किताब के बारे में लिखते हैं -“मंजरी चतुर्वेदी का यह प्रेम-पत्र,क़व्वाली पर यह किताब, अनोखा दस्तावेज़ है! इतिहास खोदकर निकाला, उस्तादों की कहानियाँ सहेजीं,औरतों की अनसुनी क़व्वालियाँ सामने लाईं.”
नीति आयोग के पूर्व सीईओ और जी-20 के शेरपा अमिताभ कांत लिखते हैं -“मंजरी चतुर्वेदी की किताब ‘क़व्वाली : इश्क़ में डूबे दिलों की पुकार’ एक कृति है. यह भारत की इस रूहानी कला का पहला शैक्षिक-दृश्य दस्तावेज़ है जो मौखिक परंपराओं, ऐतिहासिक विकास और आज की प्रैक्टिस को बड़ी नज़ाकत से जोड़ती है.”
विमोचन कार्यक्रम में मशहूर फिल्मकर राकेश ओमप्रकाश मेहरा, मुजफ्फर अली, गायक हंसराज हंस, प्रहलाद कक्कड़, अमिताभ कांत के अलावा प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल भी मौजूद रहे. मीडिया और कला क्षेत्र के दिग्गजों के बीच इस मौके पर सूफी गायन के मोहक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. हैदराबाद से आए कव्वालों ने कार्यक्रम में शमा बांध दिया. खुद मंजरी चतुर्वेदी ने इस मौके पर सूफी कथक की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया.