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न रनवे बढ़ेगा, न बनेना कोई नया टर्मिनल, आसमान में अपग्रेड होगा मुंबई एयरपोर्ट

न रनवे बढ़ेगा, न बनेना कोई नया टर्मिनल, आसमान में अपग्रेड होगा मुंबई एयरपोर्ट, बढ़ जाएगी कैपेसिटी

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Mumbai Airport Upgradation Plan: दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में शामिल मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब बिना नया कंक्रीट डाले ज्यादा विमानों और यात्रियों को संभालने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए पूरे लैंडिंग सिस्टम को बदला जा रहा है. जानें क्या है AAI का प्लान...

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मुंबई का एविएशन इकोसिस्टम एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है. यह बदलाव न तो नई रनवे बनने से दिखेगा और न ही ऊंचे-ऊंचे टर्मिनल खड़े होने से, बल्कि इससे यह तय होगा कि दुनिया के सबसे ज्यादा व्यस्त एयरस्पेस में विमानों को किस तरह से दिशा और समय दिया जाएगा.

मुंबई का एविएशन सेक्टर एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है.

दुनिया का सबसे व्यस्त सिंगल-रनवे मिक्स्ड-मोड एयरपोर्ट छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब बिना नया कंक्रीट डाले ज्यादा विमानों और यात्रियों को संभालने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए लैंडिंग की पूरी प्रणाली के नियम बदले जा रहे हैं.

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एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है. एएआई अब ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों को सिस्टम की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, ट्रेनिंग और लंबे समय तक सपोर्ट के लिए शामिल करना चाहता है. लक्ष्य है कि यह नया सिस्टम 2028 के अंत तक पूरी तरह चालू हो जाए. सीएनएन-न्यूज़18 को इससे जुड़ा डिटेल प्लान मिला है.

अगर यह योजना तय समय पर पूरी हो जाती है, तो यह ‘दिखाई न देने वाला’ तकनीकी बदलाव नए फ्लाइट स्लॉट खोल सकता है, भीड़ कम कर सकता है और देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट को भविष्य के लिए तैयार कर सकता है. यह साबित करेगा कि कई बार सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में होता है.

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वित्त वर्ष 2024-25 में मुंबई एयरपोर्ट ने साढ़े पांच करोड़ से ज्यादा यात्रियों और 3.3 लाख से अधिक विमानों की आवाजाही संभाली. आने वाले वर्षों में भारत में हवाई यात्रा की मांग और बढ़ने वाली है, जिससे दबाव और ज्यादा होगा.

AAI की क्या योजना है?

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया अब पारंपरिक और अनुमान आधारित एयर ट्रैफिक कंट्रोल से आगे बढ़कर प्रिसीजन-बेस्ड एयर ट्रैफिक कंट्रोल लाना चाहता है. इसके तहत मशीन आधारित निर्णय प्रणाली लाई जाएगी.

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इस योजना के तहत एक इंटेलिजेंट अप्रोच सिस्टम लागू किया जाएगा, जो टाइम-बेस्ड सेपरेशन पर काम करेगा. इसका मतलब है कि विमानों को लैंडिंग के समय ज्यादा सटीक तरीके से क्रम में लगाया जाएगा.

इसका नतीजा होगा ज्यादा स्मूद लैंडिंग, विमानों के बीच सुरक्षित लेकिन कम दूरी और रनवे की वास्तविक क्षमता के करीब संचालन.

क्या होगा लाभ?

फिलहाल मुंबई एयरपोर्ट पर प्रति घंटे 44 से 46 विमानों की आवाजाही होती है. विमानों के बीच दूरी में अंतर, पीक आवर्स में दबाव और ट्रैफिक के असंतुलन के कारण कई बार ट्रैफिक कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स पर काम का बोझ बढ़ जाता है.

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नया सिस्टम एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को ऐसे आधुनिक टूल देगा, जो रियल टाइम में विमानों की सही लैंडिंग टाइम निकाल सकेंगे. इसमें विमान की क्षमता, वेक टर्बुलेंस और मौसम जैसी स्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा. सीएनएन न्यूज18 से बातचीत में एक वरिष्ठ अधिकारी इसे ‘कम अनुमान, ज्यादा सटीकता’ से परिभाषित करते हैं.

इसके फायदे सिर्फ क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं. लैंडिंग के दौरान अनावश्यक घुमाव कम होगा, जिससे एयरलाइंस का ईंधन बचेगा और प्रदूषण भी घटेगा. साथ ही कंट्रोलर्स को हर वक्त दबाव में काम करने के बजाय पहले से प्लान करने का समय मिलेगा.

सबसे अहम बात यह है कि यह सिस्टम मौजूदा ऑटोमेशन, सर्विलांस अपग्रेड और डिजिटल पायलट–कंट्रोलर कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़ा होगा. साथ ही मुंबई और आने वाले नवी मुंबई एयरपोर्ट दोनों के लिए एक साझा कंट्रोल फ्रेमवर्क के तहत अप्रोच को मैनेज करेगा.

मौजूदा चुनौती क्या है?

अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच मुंबई एयरपोर्ट ने 55 मिलियन से ज्यादा यात्रियों और 3.3 लाख से अधिक विमानों की आवाजाही संभाली, जिससे यह भारत का दूसरा सबसे व्यस्त एयरपोर्ट बन गया.

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यह सारा ट्रैफिक सिर्फ एक ही मुख्य रनवे से संभाला जाता है, जहां लैंडिंग और टेक-ऑफ दोनों होते हैं. यह स्थिति मुंबई को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण एयरपोर्ट्स में ला खड़ा करती है.

भारत में हवाई यात्रा की मांग अगले दो दशकों में औसतन 5.6 फीसदी सालाना की दर से बढ़ने का अनुमान है. ऐसे में मुंबई के एयरस्पेस पर दबाव और बढ़ना तय है.

हालांकि आने वाला नवी मुंबई एयरपोर्ट भविष्य के ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा संभालेगा, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट की अहमियत अभी खत्म नहीं हुई है. टर्मिनल-2 का विस्तार पहले से चल रहा है, जिससे हर साल 50 लाख अतिरिक्त यात्रियों को संभाला जा सकेगा.

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खास बात यह है कि नया सिस्टम सिर्फ मुंबई के लिए नहीं, बल्कि नवी मुंबई एयरपोर्ट के लिए भी काम करेगा. दोनों एयरपोर्ट्स को एक साझा अप्रोच कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे मुंबई क्षेत्र के एयरस्पेस का बेहतर और समन्वित उपयोग हो सकेगा.

मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल पहले ही इसकी तैयारी कर चुका है. एडवांस्ड अराइवल मैनेजर और डिपार्चर मैनेजर सिस्टम लगभग पूरी तरह जुड़ चुके हैं. ऑटोमैटिक डिपेंडेंट सर्विलांस के जरिए निगरानी मजबूत की गई है और जिन विमानों में सुविधा है, उनके लिए डिजिटल पायलट- कंट्रोलर डेटा लिंक कम्युनिकेशन का इस्तेमाल हो रहा है.

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प्रस्तावित इंटेलिजेंट अप्रोच सिस्टम इसी पूरे ढांचे के ऊपर काम करेगा और मौजूदा एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म से पूरी तरह जुड़ा होगा.

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