'संघ शाखा में गाय का दूध या भैंस का', दूध वाले बयान पर डोटासरा ने ली चुटकी, किरोड़ी लाल मीणा ने किया पलटवार
Rajasthan Vidhansabha Madan Dilawar And Govind Dotasara : राजस्थान विधानसभा में मदन दिलावर के दूध वाले बयान पर गोविंद सिंह डोटासरा, किरोड़ी लाल मीणा और जोगाराम पटेल के बीच तंज और जवाबी तंज से माहौल हल्का और राजनीतिक हो गया. दरअसल तीन दिन पहले शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के एक बयान ने पहले ही चर्चा छेड़ रखी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि गाय का दूध बुद्धिमान बनाता है जबकि भैंस का दूध पीने वाला व्यक्ति सुस्त हो सकता है.
जयपुर. राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों सिर्फ आंकड़ों और योजनाओं की बात तक सीमित नहीं है. सदन के भीतर अब बयान, तंज और जवाबी तंज का दौर भी तेज हो गया है. पंचायतीराज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी, लेकिन बहस अचानक एक अलग दिशा में चली गई जब दूध को लेकर शुरू हुई राजनीतिक टिप्पणी ने माहौल को हल्का भी किया और गरम भी.
दरअसल तीन दिन पहले शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के एक बयान ने पहले ही चर्चा छेड़ रखी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि गाय का दूध बुद्धिमान बनाता है जबकि भैंस का दूध पीने वाला व्यक्ति सुस्त हो सकता है. उसी बयान को लेकर विधानसभा में कांग्रेस विधायक ने मौका पकड़ लिया और चर्चा के बीच मुद्दा उठाते हुए तंज कस दिया.
डोटासरा का सवाल, मीणा का जवाब
चर्चा के दौरान विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने मंत्री के बयान का जिक्र करते हुए किरोड़ी लाल मीणा से सवाल कर दिया. उन्होंने पूछा कि जब आप संघ की शाखा में जाते थे तो वहां आपको गाय का दूध पिलाया जाता था या भैंस का. इस सवाल के जवाब में किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि वहां दूध पिलाया जाता है रानी लक्ष्मीबाई का. इस पर डोटासरा ने हल्के अंदाज में कहा कि बात जमी नहीं. माहौल में हल्की मुस्कान भी दिखी, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई.
जवाब में इतिहास और राष्ट्रभक्ति
किरोड़ी लाल मीणा ने फिर खड़े होकर कहा कि शाखा में तेजाजी, चंद्रशेखर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, तिलक और सरदार पटेल जैसे महान लोगों का दूध पिलाया जाता है. उनका कहना था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में राष्ट्रभक्ति सिखाई जाती है और उनका मकसद राष्ट्र की सेवा करना है, पद के पीछे भागना नहीं. इस पर डोटासरा ने तेजाजी का जिक्र करते हुए कहा कि वह हमारे लोक देवता हैं और हम भी उनकी पूजा करते हैं. लेकिन उन्होंने फिर सवाल दोहराया कि पहले यह टेस्ट होना चाहिए कि हमारे पंचायतीराज और शिक्षा मंत्री गाय का दूध पीकर बड़े हुए हैं या भैंस का.
इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इस तरह की चर्चा पर आपत्ति जताई और कहा कि यह किस तरह की बहस हो रही है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दे से भटकने जैसा है और इसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
दूध से शुरू, राजनीति पर खत्म
पूरा घटनाक्रम एक तरह से शिक्षा मंत्री के पुराने बयान से जुड़ा हुआ था, जिसने पहले ही सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी. विधानसभा के भीतर यह मुद्दा हल्के अंदाज में आया, लेकिन राजनीतिक तल्खी भी साफ दिखी. आखिर में यह बहस सिर्फ दूध पर नहीं रही, बल्कि विचारधारा, परंपरा और राष्ट्रभक्ति की बात तक पहुंच गई. सदन में कुछ देर तक इस पर नोकझोंक चलती रही, जिससे माहौल हल्का भी हुआ और राजनीतिक संदेश भी साफ गया कि बयान अब सदन तक असर दिखा रहे हैं.
