चंद्रयान-2 : देखें कैसे पहुंचेगा 2 महीने में चांद की सतह पर
चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. अप्रैल के महीने में चंद्रयान-2 को एक भारी भरकम GSLV के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
इसरो जल्दी ही चांद पर अपने मिशन को आगे बढ़ाने वाला है. चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. अप्रैल के महीने में चंद्रयान-2 को एक भारी भरकम GSLV के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
बता दें इस चंद्रयान के तीन हिस्से होंगे. पहला हिस्सा एक रॉकेट होगा जो पूरे मिशन को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा. माना जा रहा है कि इसके लिए GSLV मेक-2 का इस्तेमाल किया जाएगा.
दूसरा हिस्सा एक रोवर होगा, जिसे चंद्रमा के ऑर्बिट यानि चंद्रमा की कक्षा में भेजा जाएगा. इसके अलावा तीसरा और सबसे अहम एक लैंडर होगा. जो असल में एक 6 पहिये वाली गाड़ी होगी, जिसे चंद्रमा की सतह पर भेजा जाएगा.
धरती से मिशन के लॉन्च होने के बाद रोवर को चंद्रमा के ऑर्बिट में पहुँचने में क़रीब दो महीने का वक़्त लगेगा. चंद्रमा धरती से क़रीब 3 लाख 82 हज़ार किलोमीटर दूर है. इसके बाद रोवर और लैंडर कुछ वक़्त तक चंद्रमा के ऑर्बिट में ही चक्कर लगाएंगे. फिर रोवर से अलग होकर लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतर जाएगा.
इस लैंडर को ठीक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा. लैंडर में बेहद हाई क्वालिटी कैमरे लगे होंगे.
ये कैमरे महज़ 15 मिनट के अंतराल पर चंद्रमा की तस्वीरें धरती तक पहुँचाते रहेंगे. लैंडर चंद्रमा पर एक पूरा दिन चलेगा लेकिन ये एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर लम्बा होगा.
इस दौरान चंद्रमा की सतह पर लैंडर तक़रीबन 200 किलोमीटर की दूरी तय करेगा और चंद्रमा की सतह से जुड़ी अहम जानकारियाँ इसरो तक पहुँचाएगा. इतना सफ़र करने के बाद लैंडर में ऊर्जा ख़त्म हो जाएगी, लेकिन मिशन ख़त्म नहीं होगा.बल्कि जब सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक दोबारा पहुँचेगी, तो लैंडर पर लगी सोलर प्लेट दोबारा चार्ज हो जाएंगी
चार्जिंग मिलने के बाद लैंडर दोबारा काम करने लगेगा और फिर से चंद्रमा पर अपना सफर आगे बढ़ाएगा. देखें चांद तक पहुंचने का चंद्रयान का पूरा ग्राफिक.
