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देववाणी की दस्तक, भीलवाड़ा से संस्कृत की पुनर्जागरण यात्रा शुरू, बच्चों ने थाम

देववाणी की दस्तक, भीलवाड़ा से संस्कृत की पुनर्जागरण यात्रा शुरू, बच्चों ने थामा ध्वज, रचा रिकार्ड

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Agency:Local18
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भीलवाड़ा की निंबार्क वैदिक संस्कृति समिति ने संस्कृत जागरूकता के लिए परीक्षा आयोजित की, जिसमें 2 लाख से अधिक बच्चों ने भाग लिया. इस उपलब्धि के लिए संस्था का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2025 में दर्ज किया गया.

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 रवि पायक/ भीलवाड़ा – देशभर में लुप्त होती जा रही संस्कृत भाषा को फिर से जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से भीलवाड़ा की निंबार्क वैदिक संस्कृति समिति ने एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल की है. समिति ने राजस्थान भर में संस्कृत भाषा परीक्षा का आयोजन किया, जिसमें 2 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया. यह आयोजन न केवल राज्य, बल्कि देशभर में अपने आप में पहला और ऐतिहासिक प्रयास है.

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संस्कृत आंदोलन में लाखों छात्र-छात्राएं शामिल
संस्था के प्रमुख महंत मोहन शरण शास्त्री ने बताया कि निंबार्क वैदिक संस्कृति समिति बीते 10 वर्षों से संस्कृत के प्रचार-प्रसार में जुटी है. इस दौरान संस्था ने प्रदेशभर के 2,28,918 विद्यार्थियों को संस्कृत आंदोलन से जोड़ा है. इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए संस्था का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2025 में दर्ज किया गया है.

संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल करने की उठी मांग
महामंडलेश्वर हंसराम महाराज ने समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जहां संस्कृत आम बोलचाल की भाषा से दूर होती जा रही है, ऐसे में इतने बड़े स्तर पर संस्कृत परीक्षा आयोजित करना एक धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि संस्कृत को पहली कक्षा से पाठ्यक्रम में अनिवार्य किया जाए.

संस्कृत सिर्फ भाषा नहीं, संस्कृति की आत्मा
महंत मोहन शरण शास्त्री ने कहा कि “संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा की आत्मा है. जब तक संस्कृत जीवित है, हमारी सांस्कृतिक जड़ें सुरक्षित हैं. हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में और भी बड़े स्तर पर संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाया जाए.”

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संस्था की ओर से भविष्य में भी जारी रहेंगे प्रयास
निंबार्क वैदिक संस्कृति समिति ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है. आने वाले समय में पूरे देशभर में संस्कृत भाषा को जनजागरण का हिस्सा बनाने के लिए और भी बड़े आयोजन किए जाएंगे. समिति का लक्ष्य है कि युवा पीढ़ी संस्कृत भाषा को न केवल समझे, बल्कि गर्व से अपनाए.

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