इधर अमेरिका क्या गए PM मोदी, उधर भागे-भागे पाक पहुंचे खलीफा एर्दोगन, कदमों में झुकी पूरी शहबाज सरकार
Erdogan Pakistan: तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन पाकिस्तान पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. उनकी यात्रा में रक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों पर चर्चा हुई. तुर्की पाकिस्तान को सैन्य सहायता दे रहा है, लेकिन भारत से संबंध बिगाड़ना नहीं चाहता.
इस्लामाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार की सुबह जब अमेरिका पहुंचे तब पड़ोसी पाकिस्तान में भी हलचल देखने को मिली. गुरुवार की सुबह तड़के रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन भी पहुंचे. एर्दोगन का स्वागत करने के लिए लगभग पूरी पाकिस्तानी सरकार एयरपोर्ट पर पहुंच गई. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फर्स्ट लेडी आसीफा भुट्टो, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मौजूद रहे. 21 तोपों की सलामी के साथ एर्दोगन का स्वागत हुआ. एर्दोगन चार दिवसीय एशिया दौरे पर थे. मलेशिया और इंडोनेशिया के बाद उनका आखिरी पड़ाव पाकिस्तान है. इस यात्रा पर भारत की भी नजर है.
एर्दोगन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब तुर्की और पाकिस्तान रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं. हाल ही में पाकिस्तान ने तुर्की से नेवी के जहाज खरीदने का समझौता किया. दोनों ने जनवरी में पूर्वी भूमध्य सागर में नौसैनिक अभ्यास आयोजित किया था, यह उनके पिछले भाषणों से एक बड़ा बदलाव दिखाता है. तुर्की लगातार पाकिस्तान की सेना को मजबूत कर रहा है. तुर्की ने पाकिस्तान को T129 ATAK हेलीकॉप्टर, MILGEM-श्रेणी के कोरवेट और विभिन्न रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति की है.
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आतंकवाद से लड़ने पर बात
दोनों देशों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग का एक और संकेत पाकिस्तान-तुर्की आतंकवाद विरोधी परामर्श का दूसरा दौर है, जो छह साल बाद इस्लामाबाद में हुआ. इसमें आतंकवाद की फंडिंग को रोकने, उग्रवाद को रोकने और ऑनलाइन चरमपंथ को नियंत्रित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों देश आतंकवाद से जूझ रहे हैं. पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी टेंशन बलूच विद्रोही और TTP है, वहीं दूसरी ओर तुर्की कुर्द अलगाववादियों से निपट रहा है.
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तुर्की की विदेश नीति में बड़ा बदलाव
पाकिस्तान से सहयोग बढ़ाने के बीच तुर्की भारत से अपने संबंध खराब नहीं करना चाहता. सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए गए अपने भाषण में एर्दोगन ने कश्मीर का जिक्र नहीं किया. यह उनके पिछले भाषणों से एक बड़ा बदलाव दिखात है. भारत से पंगा न लेने का असली कारण तुर्की की ब्रिक्स में शामिल होने की आकांक्षा है. तुर्की नाटो का सदस्य है और अगर वह ब्रिक्स में शामिल होता है तो यह देखने वाली बात होगी कि एर्दोगन अमेरिका और चीन के बीच स्थिति को कैसे संतुलित करता है.
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पूरी तरह अच्छे नहीं हैं संबंध
कश्मीर के मुद्दे पर तुर्की का नरम रुख भले ही एक सकारात्मक कदम हो, लेकिन पाकिस्तान के साथ उसके रक्षा संबंध चिंता का विषय बने हुए हैं. तुर्की लगातार पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है. उसने पाकिस्तान को ड्रोन टेक्नोलॉजी दी है. अपनी वायुसेना को मजबूत करने के बीच भारत इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है. कश्मीर पर एर्दोगन की चुप्पी भारत-तुर्की संबंधों में पूरी तरह से नरम रुख का संकेत नहीं है. तुर्की ने कथित तौर पर भारत को किसी भी रक्षा बिक्री पर रोक लगा रखी है. ऐसे में एर्दोगन की पाकिस्तान यात्रा सामान्य नहीं है.