जानिए, ग्लेशियर कैसे बन सकते हैं खतरनाक
Agency:News18Hindi
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Uttarakhand Glacier Flood: उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने (Glacier bursts in Uttarakhand) पर भारी तबाही मची हुई है. इससे चमोली जिले में बाढ़ आ गई है, जिससे सैकड़ों लोगों के प्रभावित होने का अंदेशा है.
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ग्लेशियर से तबाही मचने की खबरें नई नहीं हैं. ये दूर से देखने पर जितने खूबसूरत लगते हैं, असल में उतने ही खतरनाक होते हैं. इनकी चोटी या फिर किनारे की तरफ जाना किसी दुर्घटना को आमंत्रण दे सकता है. दूसरी ओर ग्लेशियर का टूटना या पिघलना ऐसी दुर्घटनाएं हैं, जो बड़ूी आबादी पर असर डालती हैं. सांकेतिक फोटो (pixabay)
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सबसे पहले तो समझते हैं कि ग्लेशियर से छोटे स्तर पर किस तरह के हादसे हो सकते हैं. कई बार पहाड़ों पर घूमने गए सैलानी ग्लेशियर की चोटी पर पहुंचने की कोशिश करते हैं. ये बर्फीले टावर काफी खतरनाक होते हैं और कभी भी गिर सकते हैं. यहां समझ लें कि ग्लेशियर हमेशा अस्थिर होते हैं और धीरे-धीरे सरकते हैं. ये इतनी धीमी गति से भी होता है जो आंखों से दिखाई न दे. ग्लेशियर के ज्यादा पास खड़ा होना भी हादसा ला सकता है. ग्लेशियर से बर्फ के विशाल टुकड़े गिरने से सैलानियों या स्थानीय लोगों की मौत की कई खबरें आती रहती हैं. सांकेतिक फोटो (pixabay)
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ग्लेशियर में कई बार बड़ी-बड़ी दरारें होती हैं, जो ऊपर से बर्फ की पतली परत से ढंकी होती हैं. ये जमी हुई मजबूत बर्फ की चट्टान की तरह ही दिखती है. ऐसी चट्टान के पास जाने पर वजन पड़ते ही ग्लेशियर में मौजूद बर्फ की पतली परत टूट जाती है और व्यक्ति सीधे बर्फ की विशालकाय दरार में जा गिरता है. कहना न होगा कि ये जानलेवा होता है. सांकेतिक फोटो (pixabay)
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अब बात करते हैं बड़े खतरे यानी ग्लेशियर के पिघलने की. पश्चिम अंटार्कटिका में एक ऐसा ग्लेशियर है, जिसकी बर्फ तेजी से पिघल रही है. इसे थ्वाइट्स ग्लेशियर कहते हैं जिसका आकार ब्रिटेन से भी बड़ा है. ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ये ग्लेशियर पिघल रहा है, जिससे सालाना 35 अरब टन पानी समुद्र में जा रहा है. अगर समुद्र का जलस्तर इसी तेजी से बढ़ता रहा तो पूरी दुनिया में बाढ़ आ जाएगी. यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट साइंस पैनल ने हालिया अपडेट में बताया कि साल 2100 तक समुद्र का स्तर 26 सेंटीमीटर से 1.1 मीटर तक बढ़ सकता है, जो बेहद खतरनाक है. सांकेतिक फोटो (pixabay)
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वैसे ग्लेशियर पिघलने का इंसान के जीवन पर और भी कई तरह से असर दिखता है. जैसे इससे जमीन में जलस्तर बढ़ेगा और फसलें तबाह हो जाएंगी. ग्लेशियर उल्टी तरह से भी असर करता है, जैसे एक ओर तो गर्मी में अपनी सामान्य गति से पिघलना आसपास के लोगों के लिए वरदान होता है क्योंकि इससे उन्हें पानी की आपूर्ति होती है, वहीं इसका पूरी तरह से पिघल जाना पानी की समस्या पैदा कर देता है. एक ओर इससे बाढ़ आ जाती है तो दूसरे मौसम में पानी का संकट आ जाता है. मिसाल के तौर पर साल 2016 में बोलिविया में यही हुआ था, जब वहां का एंडियन ग्लेशियर तेजी से पिघला था. सांकेतिक फोटो (pixabay)
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First Published :
February 07, 2021, 14:23 IST