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किसी अजूबे से कम नहीं है श्रीहरिकोटा, जानें- इसरो यहीं से क्यों करता है 'चमत्कार'
किसी अजूबे से कम नहीं है श्रीहरिकोटा, जानें- इसरो यहीं से क्यों करता है 'चमत्कार'
Agency:News18India.com
Last Updated:
इसरो के हर प्रक्षेपण में आप जिस श्रीहरिकोटा के बारे में सुनते हैं, आखिर वो कैसी जगह है? और हर प्रक्षेपण वहीं से क्यों होता है। आइए जानते हैं देश के बड़े लॉन्चिंग स्टेशन के बारे में खास बातें...
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इसरो के हर प्रक्षेपण में आप जिस श्रीहरिकोटा के बारे में सुनते हैं, आखिर वो कैसी जगह है? और हर प्रक्षेपण वहीं से क्यों होता है। आइए जानते हैं देश के इस लॉन्चिंग स्टेशन के बारे में खास बातें... रिपोर्टः मुकेश तिवारी
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सतीश धवन स्पेस सेंटर (SHAR) श्रीहरिकोटा में स्थित है। यह एक स्पिंडल शेप आइलैंड है जो आंध्र प्रदेश में स्थित है। इक्वेटर से इसकी करीबी (पूर्व दिशा की तरफ लॉन्चिंग में फायदेमंद) यहां से लॉन्चिंग होने की एक बड़ी वजह है।
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श्रीहरिकोटा आइलैंड को 1969 में सैटलाइट लॉन्चिंग स्टेशन के रूप में चयनित किया गया था। 1971 में RH-125 साउंडिंग रॉकेट की लॉन्चिंग के साथ सेंटर ऑपरेशनल हुआ। पहला ऑर्बिट सैटलाइट रोहिणी 1A 10 अगस्त 1979 को लॉन्च किया गया लेकिन एक खामी की वजह से 19 अगस्त को यह नष्ट हो गया।
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श्रीहरिकोटा ही क्यों? इसकी पहली वजह श्रीहरिकोटा की लोकेशन ही है। इक्वेटर से इसकी करीबी इसे जियोस्टेशनरी सैटलाइट के लिए उत्तम लॉन्च साइट बनाती है। यह पूर्व दिशा की तरफ होने वाली लॉन्चिंग के लिए बेहतरीन है। पूर्वी तट पर स्थित होने से इसे अतिरिक्त 0.4 km/s की वेलोसिटी मिलती है। ज्यादातर सैटलाइट को पूर्व की तरफ ही लॉन्च किया जाता है।
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उपलब्धता: यहां तक पहुंचने वाले उपकरण बेहद भारी होते हैं। इन्हें दुनिया के कोने कोने से यहां लाया जाता है। जमीन, हवा और पानी हर तरह से यहां पहुंचना बेहतर है।
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यह नेशनल हाइवे (NH-5) पर स्थित है। नजदीक के रेलवे स्टेशन से 20 किलोमीटर और चेन्नई के इंटरनेशनल पोर्ट से 70 किलोमीटर दूर है।
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सुरक्षाः ऐसे काम के लिए आपको आबादी से दूर रहने की जरूरत होती है। जनता की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत पहला काम होती है। इसीलिए दुनिया के ज्यादातर लॉन्चिंग पैड वाटर बॉडीज के पास हैं। बैकोनुर एक अपवाद है। भारत में दो लॉन्चिंग पैड हैं। एक श्रीहरिकोटा में और दूसरा थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन, तिरुवनंतपुरम में है।
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पृथ्वी की परिक्रमाः पृथ्वी की परिक्रमा को हर मिशन अपने लिए इस्तेमाल कर लेना चाहता है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की तरफ परिक्रमा करती है इसलिए परिक्रमा को एक बूस्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और ईंधन की भी बचत होती है।
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यहां की आबादी बेहद कम है और यहां रहने वाले ज्यादातर लोग या तो इसरो से ही जुड़े हैं या फिर स्थानीय मछुआरे हैं...
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इसरो की इजाजत से ऐसा संभव है कि आप लॉन्चिंग पैड को देख सकें। हर बुधवार को विजिटर्स को लिमिटेड एक्सेस के साथ यहां ले जाया जाता है।
First Published :
February 15, 2017, 09:49 IST