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सरकार चाहती है सिर्फ कमजोर वर्ग को मिले LPG subsidy, क्‍या खत्‍म होगी सब्सिडी?

LPG subsidy: सरकार चाहती है सिर्फ कमजोर वर्ग को मिले रसोई गैस के दाम में छूट, तो क्‍या पूरी तरह से खत्‍म होगी सब्सिडी?

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केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) मौजूदा रसोई गैस सब्सिडी (LPG Subsidy) व्‍यवस्‍था की समीक्षा कर रही है. सरकार चाहती है कि सभी आर्थिक फैसले (Economic Decisions) लंबी अवधि के फायदों को ध्‍यान में रखकर किए जाने चाहिए.

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आसान हुआ गैस का नया कनेक्‍शन लेना (LPG connection)
नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार देश के कमजोर वर्ग के अलावा बाकी सभी को दी जाने वाली रसाई गैस सब्सिडी (LPG Subsidy) को खत्‍म करना चाहती है. दरअसल, केंद्र मौजूदा एलपीजी सब्सिडी व्‍यवस्‍था की समीक्षा कर रहा है. सरकार का मानना है कि सभी आर्थिक फैसले (Economic Decisions) लंबी अवधि को ध्‍यान में रखकर किए जाने चाहिए. बता दें कि एक साल पहले के मुकाबले अप्रैल-जुलाई 2021 के दौरान पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स पर दी जाने वाली सब्सिडी (Petroleum Products Subsidy) 92 फीसदी घट गई है.

केंद्र ने सब्सिडी ट्रांसफर करने पर लगाई रोक
केंद्र सरकार ने रसोई गैस की कीमतों में तेज वृद्धि (LPG Price Hike) के बावजूद लाखों लाभार्थियों को एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी है. साल 2021-22 के पहले चार महीनों में पेट्रोलियम सब्सिडी 1,233 करोड़ रुपये हुई, जो साल 2020-21 की समान अवधि में 16,461 करोड़ रुपये रही थी. उस समय गरीब तबके के परिवारों को तीन एलपीजी सिलेंडर मुफ्त दिए जा रहे थे. सूत्रों के मुताबिक, एक आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) से संकेत मिला है कि एलपीजी सिलेंडर के लिए ग्राहकों को प्रति सिलेंडर 1,000 रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है.
सरकार के पास हैं दो विकल्‍प
सरकार ने सब्सिडी के मुद्दे पर कई बार चर्चा की है, लेकिन अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है. सरकार के पास 2 विकल्प हैं. पहला, बिना सब्सिडी के सिलेंडर की आपूर्ति करे. दूसरा, कुछ ग्राहकों को सब्सिडी का लाभ दिया जाए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी 10 लाख रुपये इनकम के नियम को लागू रखा जाएगा और उज्ज्वला योजना (Ujjwala Scheme) के लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा. बाकी लोगों के लिए सब्सिडी खत्म हो सकती है. बता दें कि यह योजना 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन (LPG connection) उपलब्‍ध कराने के लिए शुरू की गई थी.
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अभी ऐसा है सब्सिडी का हाल
कोरोनो वायरस महामारी के चलते 2020 में दुनियाभर में लॉकडाउन लगाया गया था. उस समय मांग घटने पर कच्चे तेल की कीमतें गिर गई थीं. इससे भारत सरकार को एलपीजी सब्सिडी (LPG Subsidy) के मोर्चे पर मदद मिली क्योंकि कीमतें कम थीं और सब्सिडी को लेकर बदलाव की जरूरत नहीं थी. मई 2020 से कई क्षेत्रों में एलपीजी सब्सिडी बंद हो गई है.
सब्सिडी पर सरकार का खर्च
सब्सिडी पर सरकार का खर्च वित्त वर्ष 2021 के दौरान 3,559 रुपये रहा. वित्त वर्ष 2020 में यह खर्च 24,468 करोड़ रुपये का था. दरअसल, ये डीबीटी स्कीम के तहत है, जिसकी शुरुआत जनवरी 2015 में की गई थी. इसके तहत ग्राहकों को गैर-सब्सिडी एलपीजी सिलेंडर का पूरा पैसा चुकाना होता है. इसके बाद सरकार की तरफ से सब्सिडी का पैसा ग्राहक के बैंक खाते में रिफंड कर दिया जाता है. चूंकि यह रिफंड डायरेक्ट होता है, इसलिए स्कीम का नाम DBTL रखा गया है.
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