छुक-छुक की आवाज के साथ इस रूट पर दौड़ेगी भाप इंजन वाली ट्रेन!

छुक-छुक की आवाज के साथ इस रूट पर दौड़ेगी भाप इंजन वाली ट्रेन!
भाप इंजन

विदेशी सैलानियों (Tourist) के बीच स्टीम इंजन (Steam Engine) को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है. इसी को देखते हुए रेलवे ने कुछ पुराने भाप इंजन की मरम्मत कर उसे फिर से चलने लायक बनाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 13, 2019, 6:07 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रेल (Indian Rail) नए साल के मौके पर विदेशी पर्यटकों (Tourist) को लुभाने के लिए के भाप इंजन (Steam Engine) का इस्तेमाल कर रही है. विदेशी सैलानियों के लिए भाप इंजन अभी भी बड़े आकर्षण का केंद्र है. इसके लिए रेलवे के तिरुचिरापल्ली के गोल्डन रॉक वर्क शॉप में नया भाप इंजन भी बनाया गया है.विदेशी सैलानियों में मीटर गेज पर चलने वाले X-क्लास के भाप ईंजन को लेकर गज़ब का आकर्षण है. इसे देखते हुए रेलवे ने कुछ पुराने भाप इंजन को मरम्मत कर फिर से चलने लायक भी बनाया है. वहीं IRCTC ने इसके लिए स्पेशल पैकेज ऑन फुल टैरिफ रेट भी चला रहा है. यानी FTR पर पूरी ट्रेन को किराये पर दिया जाता है.

स्टीम इंजन का इतिहास आंकड़ों की जुबानी
- 108 साल पुराना है केसी-520 स्टीम लोकोमोटिव इंजन
- 1905 में अंग्रेजों ने शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया
- 1971 के बाद 30 सालों तक वर्कशॉप में खड़ा रहा
- 2001 में दोबारा बना कर तैयार किया गया


- 41 टन है इंजन का वजन
- 80 टन तक खींचने की क्षमता

पिस्टन से निकलती है ‘छुक-छुक’ की आवाज- स्टीम इंजन में भाप के पिस्टन में आगे पीछे चलने और बाहर निकलने से छुक-छुक की आवाज पैदा होती है. डीजल इंजन के मुकाबले स्टीम इंजन की सीटी ज्यादा तीखी और दूर तक सुनाई देने वाली होती है. इंजन में लाइट भी स्टीम से ही जलती है.



विदेशी सैलानियों ने ऐसी ही एक ट्रेन शनिवार के लिए किराये पर ली है. भाप इंजन से चलने वाली ये ट्रेन चेन्नई एग्मोर से कोडमबक्कम तक जाएगी.

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इससे पहले सोमवार को ऊटी की टॉय ट्रेन पर ब्रिटेन, रूस और अमरीका से आए सैलानियों ने सफर किया. सैलानियों ने नीलगिरी पहाड़ियों में सैर का भी आनंद लिया और भाप इंजन के साथ जमकर फ़ोटो भी लिये. नीलगिरी पर चलने वाली ये ट्रेन 1908 में शुरू की गई थी. 2005 में यूनेस्को ने इसे हेरिटेज साइट में शामिल किया था. क़रीब 42 किलोमीटर लंबा ये सफर 16 सुरंगों, 250 पुल और पहाड़ियों के 208 मोड़ से होकर गुज़रता है.

चंदन जजवाड़े

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