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क्यों अमेरिका की ये जेल हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में बड़ा मुद्दा बन जाती है?

ग्वांतानमो खाड़ी के तट पर स्थित इस जेल में दुनियाभर में आतंकी फैलाने में एक्टिव रहे कुल 40 कैदी है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
ग्वांतानमो खाड़ी के तट पर स्थित इस जेल में दुनियाभर में आतंकी फैलाने में एक्टिव रहे कुल 40 कैदी है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

चर्चा है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) दुनिया की सबसे महंगी जेल को बंद करवा सकते हैं. ग्वांतानमो बे ((Guantánamo Bay) नाम की इस जेल में सौ से भी कम कैदियों पर हर साल अरबों रुपये जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 1:56 PM IST
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जनवरी में जो बाइडन (Joe Biden) अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर सत्ता संभाल लेंगे. इस दौरान बात हो रही है कि ट्रंप से उनकी नीतियां कैसे अलग होंगी. साथ ही ग्वांतानमो बे (Guantánamo Bay) जेल का जिक्र भी हो रहा है. आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी मुहिम में इस जेल में खूंखार आतंकियों को रखा गया था. अब यहां केवल 40 कैदी हैं, जिस पर सालाना अरबों रुपये जा रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या बाइडन सरकार जेल पर ताला लगवा सकती है.

ओबामा के दौरान हुई थी चर्चा
ट्रंप से ठीक पहले पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ग्वांतानमो बे जेल को बंद करने की बात की थी. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इतनी महंगी जेल के कैदियों को किसी दूसरी सेफ जेल में भेज दिया जाना चाहिए और जेल बंद हो जानी चाहिए. इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. यहां तक कि विरोध की दशा में ओबामा ने वीटो पावर के इस्तेमाल तक की बात की थी, हालांकि ऐसा हो नहीं सका.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ग्वांतानमो बे जेल को बंद करने की बात की थी

कई जेल और कैदी रहे खर्चीले


दूसरे विश्व युद्ध के बाद एक जर्मन कैदी रूडोल्फ हैस को जेल में रखने पर हर साल जो खर्च होता है, वो आज की कीमत से 1.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा है. इसी तरह से अमेरिका में कुछ बेहद खूंखार कैदियों के रखरखाव पर कोलेराडो में 78,000 डॉलर खर्च करने का प्रावधान बना. लेकिन ये सारे खर्च क्यूबा के ग्वांतानमो बे जेल के आगे कुछ नहीं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां दुनिया के सबसे खतरनाक और मास्टरमाइंड अपराधी कैद हैं. इन्हें संभालने से लेकर इन्हें जिंदा रखने के लिए सारी सुविधाओं को मिलाकर 540 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा खर्च हो चुका है.

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1 कैदी पर 45 सैनिक
ग्वांतानमो खाड़ी के तट पर स्थित इस जेल में दुनियाभर में आतंकी फैलाने में एक्टिव रहे कुल 40 कैदी है. इनकी सुरक्षा के लिए 1800 सैनिक तैनात हैं. यानी एक कैदी की सुरक्षा 45 सैनिक करते हैं. इसके अलावा जेल के दूसरे कामों और खाने-पीने की सुविधा के लिए अलग से स्टाफ है. जेल तीन इमारतों में बंटी हुई है. इनमें दो खुफिया हेडक्वार्टर हैं. साथ ही कम से कम तीन क्लिनिक हैं. इमारत इतने सख्त पहरे में रहता है कि यहां से बाहर की बातें और यहां तक कि स्ट्रक्टर भी पूरी तरह से सामने नहीं आ सका है.

जेल परिसर के भीतर ही कोर्ट और पेरोल बोर्ड हीयरिंग रूम हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


जेल परिसर के भीतर ही कोर्ट और पेरोल बोर्ड हियरिंग रूम हैं. साथ ही दो कंपाउंड अलग से बने हुए हैं, जहां हर कैदी अपने वकील से अकेले में मिल सकता है. इस जेल के स्टाफ और कैदियों को होटल जैसी सुविधाएं मिलती हैं. कैदियों के लिए इस जेल में चर्च, जिम, प्ले स्टेशन और सिनेमा हॉल की व्यवस्था की गई है. कैदियों की मानसिक सेहत के लिए यहां अलग से एक्सपर्ट हैं. अगर कोई कैदी अपने लिए कुत्ते या किसी दूसरे जानवर की मांग करता है, तो ये भी उसे मुहैया कराया जा सकता है.

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बड़े आतंकी हमलों के लिए रहे जिम्मेदार
इसके बाद साल 2018 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने इस जेल को बनाए रखने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर दिया. इसकी वजह ये बताई जाती है कि यहां रहने वाले सारे ही कैदी बड़े आतंकी हमलों के जिम्मेदार रहे हैं. ऐसे में उन्हें किसी और जेल में रखना या दूसरे कैदियों से उनकी मुलाकात काफी खतरनाक हो सकती है. यही वजह है कि इतना खर्चीला होने के बाद भी इस जेल को बनाए रखा गया है.

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खर्च पर उठते आए हैं सवाल
इसके बाद भी जेल में कैदियों की सुरक्षा पर खर्च को लेकर लगातार सवाल होते रहे हैं. एक नेवी लॉयर कैप्टन ब्रायन एल माइजर ने इस जेल का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि ये अमेरिका का बुटीक प्रिजन है, जो खासतौर पर बड़ी उम्र के जिहादियों के लिए बना हुआ है. जरूरत से ज्यादा खर्चीला होने के कारण इसके बंद किए जाने की मांग भी उठती रही है. लोगों का कहना है कि कैदियों को किसी और जेल में भेज दिया जाना चाहिए.

जेल में कैदियों की सुरक्षा पर खर्च को लेकर लगातार सवाल होते रहे. सांकेतिक फोटो


प्रताड़ना की खबरें भी आती रहती हैं
वैसे दुनिया का सबसे महंगा डिटेंशन सेंटर होने के बाद भी यहां कैदियों के साथ टॉर्चर होता रहता है. ये और बात है कि इसकी खबर बाहरी दुनिया को नहीं लग पाती है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस (ICRC) के हवाले ये जानकारी निकाली. रेड क्रॉस ने अपने एक इंस्पेक्शन के दौरान पाया कि कैदियों का भयंकर यंत्रणा दी जाती है. लेकिन ये मारपीट नहीं, बल्कि अलग-अलग तरीकों से होती है.

किसी कैदी को आइसोलेशन में रख दिया जाता है और कई-कई महीने तक वो अंधेरी कोठरी में बंद रहता है, जहां कोई इंसानी आवाज न आए. किसी कैदी को इतनी तेज आवाज में रखा जाता है कि वो मानसिक तौर पर परेशान हो जाए. किसी को इस खास तरीके से बैठने या खड़ा रहने की सजा मिलती है कि उनके सारे शरीर का वजन एक या दो मांसपेशियों पर पड़े. इससे भयंकर दर्द होता है.
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