उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा- प्रेस की आज़ादी पर कोई भी आघात देश के लिए नुकसानदेह

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज़ाद और निर्भीक प्रेस के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती. (File Photo)

National Press Day: उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि लोकतंत्र (Democracy) की जड़ों को मजबूत करने में देश की प्रेस हमेशा अग्रणी भूमिका में रही है. लोकतंत्र को मजबूत करने और संवैधानिक के अनुसार कानून का राज सुनिश्चित करने में एक मुखर, आज़ाद और जागरूक मीडिया की उतनी ही आवश्यकता है जितना की स्वतंत्र न्यायपालिका.

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय प्रेस दिवस (National Press Day) के मौके पर देश के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू (Vice President Venkaiah Naidu) ने कहा कि प्रेस की आज़ादी (Freedom of Press) पर कोई भी आघात राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध होगा. प्रेस की आज़ादी पर आघात का हर एक नागरिक द्वारा विरोध किया जाना चाहिए. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज़ाद और निर्भीक प्रेस के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती. इस वेबिनार कार्यक्रम का विषय था-कोविड महामारी (Covid Pandemic) के दौरान मीडिया की भूमिका और मीडिया पर महामारी का असर.

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि लोकतंत्र (Democracy) की जड़ों को मजबूत करने में देश की प्रेस हमेशा अग्रणी भूमिका में रही है. लोकतंत्र को मजबूत करने और संवैधानिक के अनुसार कानून का राज सुनिश्चित करने में एक मुखर, आज़ाद और जागरूक मीडिया की उतनी ही आवश्यकता है जितना की स्वतंत्र न्यायपालिका. वैंकया नायडू ने इस मौके पर मीडिया से आग्रह किया कि अपनी रिपोर्ट में वस्तुनिष्ठ, तथ्यात्मक, और निष्पक्ष रहे. सनसनी फैलाने और खबरों में पूर्वाग्रह मिलाने की प्रवृत्ति से बचने की भी सलाह उपराष्ट्रपति ने दी. मीडिया को विकासपरक खबरों को अधिक तरजीह दी जानी चाहिए.

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कोरोना काल में मीडिया ने निभाई अहम भूमिका
कोरोना महामारी के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों की अग्रणी भूमिका की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामारी के खतरों के बावजूद उन्होंने लगातार सूचना उपलब्ध कराई है. इसके लिए उन्होंने सभी पत्रकार, कैमरामैन और अन्य मीडियाकर्मियों का अभिनन्दन किया. जब अप्रामाणिक अफवाहों का बाजार गर्म हो, ऐसे में महामारी के दौरान सही समय पर प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराया जाना नितान्त आवश्यक है. साथ ही उपराष्ट्रपति ने कहा कि अप्रामाणिक अफवाहों से बचाने के लिए जन जागृति और शिक्षण का प्रसार करने में मीडिया की महती भूमिका है.

कोरोना संक्रमण से पत्रकारों की हुई मौत पर व्यक्त की संवेदना
कोरोना वायरस की चपेट में आने से देश दुनियां के लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. बड़ी तादाद में पत्रकारों की भी मौत हुई है.उपराष्ट्रपति ने उन पत्रकारों के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की जिनकी इस महामारी के दौरान, संक्रमण के कारण मृत्यु हुई.

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कोरोना काल में नौकरी से निकाला जाना दुर्भाग्यपूर्ण
मीडिया पर महामारी के प्रभाव का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कई समाचार पत्रों ने अपने संस्करणों में कटौती की है और डिजिटल संस्करण निकालने लगे हैं.इस संदर्भ में उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हो रही पत्रकारों की छंटनी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि इन विषम परिस्थितियों में पत्रकारों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता.उपराष्ट्रपति ने सभी हितधारकों से साथ मिल कर इस विषम परिस्थिति से निपटने के कारगर और सार्थक उपाय ढूंढने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि महामारी ने मीडिया संस्थानों को अधिक लचीला, स्थाई और स्वीकार्य राजस्व मॉडल अपनाने का अवसर दिया है. सामाजिक मिलजोल के बिना, इस अवधि में अधिक से अधिक लोग घर पर ही रह कर ताज़ा खबरों और मनोरंजन के लिए मीडिया पर ही निर्भर रहे. इस संदर्भ में रामायण और महाभारत की लोकप्रियता की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने मीडिया जगत से आग्रह किया कि वह अपने दर्शकों में विस्तार करे और राजस्व के नए मॉडल खोजे.

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