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कोरोना ने बदल दिया राजनीति का चेहरा, राहुल गांधी बने पत्रकार!

कोरोना ने बदल दिया राजनीति का चेहरा, राहुल गांधी बने पत्रकार!

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जो अक्सर पत्रकारों पर सही सवाल नहीं उठाने का आरोप लगाते हैं, अब खुद ही इस भूमिका में नजर आ रहे हैं. यह उनकी स्ट्रेटजी है. वो सरकार के खिलाफ अति आक्रामक होने से बच रहे हैं और अपनी बात भी कह रहे हैं.

कोरोना ने बदल दिया राजनीति का चेहरा, राहुल गांधी बने पत्रकार!Zoom
बातचीत के दौरान राहुल गांधी और रघुराम राजन
नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया पर कहर बरपा रखा है. इसने लोगों की लाइफ-स्टाइल से लेकर राजनीति भी बदल दी है. जब बात साथ मिलकर लड़ने की बात हो रही है, तो विपक्षी दल सरकार की खुली आलोचना भी नहीं कर सकते. लेकिन उन्हें सरकार और जनता तक अपनी बात भी पहुंचानी है. कांग्रेस (Congress) और राहुल गांधी ने इसका दूसरा रास्ता निकाल लिया है. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जो अब तक अक्सर पत्रकारों पर सही सवाल नहीं उठाने का आरोप लगाते रहे हैं, अब खुद ही इस भूमिका में नजर आ रहे हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रिजर्व बैंक औफ इंडिया (आरबीआई) के पूर्व गवंर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) का ऑनलाइन इंटरव्यू किया. राहुल के ज्यादातर सवाल इकोनॉमी पर लॉकडाउन के असर और उसे उबारने के लिए प्रयासों पर केंद्रित थे. उन्होंने कोविड-19 को लेकर भी सवाल किए कि इसे काबू करने के लिए स्ट्रेटजी क्या हो सकती है और इसमें कहां कमी रह जा रही है.
दरअसल, राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे नेता कोरोना वायरस के खिलाफ अपनाई जा रही स्ट्रेटजी को लेकर पहले से सवाल करते रहे हैं. जैसे कि कोविड-19 का टेस्ट ज्यादा होना चाहिए या इकोनॉमी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए क्या किया जाना चाहिए. पार्टी प्रवासी मजदूरों के बारे में भी लगातार सवाल उठाती रही है. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक कंसलटेटिव पैनल भी बनाया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी जैसे नेता शामिल हैं. पैनल बनाने का उद्देश्य यह है कि पार्टी सरकार को सुझाव देकर अपनी अहमियत बनाए रखना चाहती है.
दरअसल, पिछले सालों में कांग्रेस की ताकत घटी है और क्षेत्रीय दल मजबूत हुए हैं. खासकर वह उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे अहम राज्यों में कमजोर है. उसे कोरोना वायरस के वक्त खुद की मौजूदगी भी दर्ज करानी है और सरकार की ज्यादा आलोचना भी नहीं करनी है. ज्यादा आलोचना से उस पर एंटी नेशनल होने का आरोप लगाया जा सकता है. इसीलिए कांग्रेस ने अपनी स्ट्रेटजी बदल ली है.
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कांग्रेस को पता है कि कोरोना वायरस के वक्त ज्यादा आक्रामक होना या चुप रहना दोधारी तलवार साबित हो सकते हैं. इसलिए उसने अपने सवाल सुझाव की शक्ल में रखने की रणनीति बनाई है. कांग्रेस इस बात से भी खुश है कि उसके कुछ सुझावों पर सरकार देर से ही सही, लेकिन सक्रिय हुई है. इन सुझावों में प्रवासी मजदूरों की आवाजाही शामिल है. कांग्रेस का कहना है कि आखिर अंत में सरकार ने इसे समस्या मान लिया है और अब उनकी घरवापसी की स्ट्रेटजी पर काम कर रही है.
राहुल गांधी जब रघुराम राजन से बात करते हैं तो वे सरकार के प्रति अति आक्रामक होने से बचते हैं. हालांकि, रघुराम राजन सरकार की कुछ खामियों की बात करते हैं और सुझाव देते हैं. माना जा रहा है कि यह अपनी तरह का पहला इंटरव्यू हो सकता है, लेकिन इसका सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है. राहुल गांधी रघुराम राजन के बाद वायरस स्पेशलिस्ट, हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट से बात कर सकते हैं. यह सिलसिला राजनीतिज्ञों से लेकर अर्थशास्त्रियों तक जाएगा.
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