जम्मू-कश्मीर: लादेन बनना चाहता था ओसामा इसलिए किया BJP नेता का कत्ल
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ रीजन में पिछले दिनों आतंकी हमले में मारे गए भारतीय जनता पार्टी नेता अनिल परिहार और उनके भाई की हत्या के प्लॉट की कहानी. कैसे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने रची इस हत्याकांड की साज़िश?
'एक दिन मैं लश्कर का कमांडर बनूंगा, इंशाअल्लाह. और ख़्वाब तो और भी बड़े हैं भाईजान.' जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ का रहने वाला नौजवान लड़का ओसामा कुख्यात और खूंखार आतंकवादी बनने की महत्वाकांक्षा रखता था. उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर पूरी साज़िश रची और हाई प्रोफाइल हत्याकांड को अंजाम दिया ताकि वह सुर्खियों में आ सके और आतंकवाद की दुनिया में उसका नाम हो.
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बंदूकें, बम ओसामा को अपनी तरफ खींचते थे. और उसका नाम उसके सपनों व महत्वाकांक्षाओं की आग में घी का काम करता था. वह चाहता था कि ओसामा बिन लादेन की तरह वह भी एक ऐसा आतंकवादी बने जिससे सब डरें और कांपें. कुछ वक्त पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कुछ आतंकियों ने किश्तवाड़ की तरफ चुपके से घुसपैठ की ताकि कुछ नौजवानों को संगठन में भर्ती और ट्रेंड किया जा सके. और, एक टीचर के बेटे ओसामा के लिए यही मौका सुनहरा साबित हुआ.
तकरीबन एक साल पहले नौजवान ओसामा लश्कर के आतंकी के तौर पर भर्ती किया गया. उसे हथियारों की ट्रेनिंग दी गई और फिर उसे किश्तवाड़ में ही रहने की हिदायत दी गई. ओसामा बेचैन था कि वह किसी आॅपरेशन का हिस्सा बने, लेकिन उससे हर बार कहा गया कि वक्त आने पर उसे हुक्म दिया जाएगा. इसी बीच, सितंबर-अक्टूबर के महीने के दौरान एक साज़िश तैयार होने लगी थी.
इस तरह हुआ लश्कर के आतंकियों का मूवमेंट
कश्मीर के पुलवामा इलाके से लश्कर की गतिविधियों को आॅपरेट करने वाला एक आतंकी सज्जाद खांडे को एक हुक्म मिला और उसने साज़िश तैयार करने की शुरुआत की. आईईडी यानी विस्फोटकों के इस्तेमाल में माहिर सज्जाद ने पुलवामा से छुपते छुपाते हुए एक सरकारी कॉंट्रैक्टर की मदद से किश्तवाड़ की तरफ रुख किया. इस साज़िश को अंजाम देने के लिए संगठन के कुछ आतंकियों को डोडा इलाके में भी भेजा गया ताकि इंटेलिजेंस को अगर मूवमेंट की कोई खबर मिले तो वह पूरी तरह एक रीजन पर फोकस न कर पाए.
सज्जाद लश्कर के लिए लोकल लड़कों की भर्ती करने में भी हिस्सा लिया करता था और लश्कर के मुखियाओं का मानना था कि बातों से प्रभावित करके लड़कों को आतंकी लड़ाका बनाने का हुनर सज्जाद जानता था. सज्जाद ने किश्तवाड़ आकर ओसामा ने कॉंटैक्ट किया और सबसे पहले लोकल सपोर्ट सिस्टम तैयार किया ताकि किश्तवाड़ में वह और ओसामा महफूज़ रह सकें और साज़िश को अंजाम देने के बाद भी उन पर खतरा न हो. किश्तवाड़ में ही गुपचुप ठिकाने तैयार किए गए.
ओसामा : भाईजान, मिशन क्या है? निशाना कौन है?
सज्जाद : तू सवाल बड़े पूछता है यार. सब्र रख, सब पता चल जाएगा.
ओसामा : लेकिन भाईजान आप मुझे बता देंगे तो मैं लोकल हूं, कुछ और भी मदद कर सकता हूं.
सज्जाद : कभी पहले मारा है किसी को? गोली चलाई है कभी? ये तेरा पहला आपरेशन है, ट्रेनिंग में जो सिखाया है, बस उसी तरह कवर करना और आॅर्डर फॉलो करना.
ओसामा इस प्लैन को लेकर बेहद बेचैन था और वह मन ही मन सोच रहा था कि कम से कम एक गोली तो वह भी चलाएगा. फिर सज्जाद ने एक दिन ओसामा से कहा कि वह ऐसी लोकल मोबाइल सिम का इंतज़ाम करे, जिसके इस्तेमाल से किसी किस्म का कोई खतरा न हो. ओसामा ने अपना हुनर दिखाने के लिए आगे बढ़कर यह ज़िम्मेदारी ली. ओसामा ने सिम का इंतज़ाम बखूबी किया.
लोकल मोबाइल सिम का इंतज़ाम और वॉट्सएप कॉल
किश्तवाड़ की एक लोकल महिला के मारफत सिम खरीदी गई जिसे किसी साज़िश के बारे में कोई भनक नहीं थी. इस महिला के ज़रिये यह सिम ओसामा की बहन तक पहुंची और फिर बहन से किसी तरह ओसामा ने यह सिम हासिल की. ओसामा ने इस तरह इस सिम का ब्योरा सज्जाद को दिया और अब साज़िश को अंजाम देना तय था. निशाने पर नज़र रखने यानी रेकी के बाद तारीख और वक्त मुकर्रर कर लिया गया था. सज्जाद ने अपने आकाओं से फोन पर बातचीत कर ली थी.
इस प्लैन के तहत इसी महीने यानी नवंबर की शुरुआत में ही किश्तवाड़ में रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सचिव और नेता अनिल परिहार पर निगरानी रखी गई. सज्जाद और ओसामा अपनी पोज़ीशन ले चुके थे. अनिल अपने भाई अजीत के साथ दुकान बंद कर रहे थे तभी वॉट्सएप कॉल के ज़रिये दोनों को बताया गया कि अनिल दुकान से किस गली की तरफ निकल रहा था. सज्जाद और ओसामा बाइक से अनिल के एकदम पास तक पहुंचे.
'हैंड्स अप', सज्जाद ने बंदकू तानकर अनिल से जैसे ही यह लफ़्ज़ कहा तो अनिल ने अचानक हुए इस हमले से डर के मारे हाथ उठा दिए. तभी, एक गोली पॉइंट ब्लैंक रेंज से अनिल के माथे पर मारी गई. गोली चलते ही पीछे से अजीत ने अनिल को बचाने और हमलावरों को दबोचने की कोशिश करना चाही तो अजीत को भी गोली मार दी गई. इसके बाद दोनों हमलावर बाइक से ही फौरन भाग खड़े हुए.
'भाईजान, अब तो हमें इनाम मिलेगा? और आॅर्गनाइज़ेशन में हमें इज़्ज़त भी...' ओसामा ने जब यह कहा तो सज्जाद ने उसे डांटते हुए कहा - 'ओए चुप ओए. अभी काम खत्म नहीं हुआ. ये काम तेरा पहला था, आखिरी नहीं. फिलहाल यहां से सफर की सोच.' किश्तवाड़ के ही परवेज़ और नसीर की मदद से महफूज़ ठिकाने का इंतज़ाम कर लिया गया था. दोनों वहां पहुंचे और चार दिनों तक छुपे रहे. इन चार दिनों में दोनों के किश्तवाड़ से निकलने की तैयारी की गई और सज्जाद व ओसामा पूरे एहतियात के साथ वहां से निकल गए.
(यह कहानी एनआईए से जुड़े सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों पर आधारित है.)
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