नहीं रहे 'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी, देश में 7 दिन का राजकीय शोक
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुरुवार को एम्स दिल्ली में आखिरी सांस ली. लंबी बीमारी के बाद 93 साल की उम्र में उनका निधन हो गया
भारतीय राजनीति के करिश्माई नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बी बीमारी के बाद गुरुवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया. उन्होंने संकट के कई अवसरों पर देश को नेतृत्व प्रदान किया और समावेशी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए बखूबी गठबंधन सरकार चलाई.
वाजपेयी 93 साल के थे. उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री के निधन की जानकारी एम्स के मीडिया एवं प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष प्रो. आरती विज ने दी. उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा कि गहरे शोक के साथ हम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की सूचना दे रहे हैं.
एम्स के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री का निधन गुरुवार शाम पांच बजकर पांच मिनट पर हुआ.
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विज्ञप्ति में कहा गया है कि वाजपेयी को 11 जून 2018 को एम्स में भर्ती कराया गया था और डाक्टरों की निगरानी में पिछले नौ सप्ताह से उनकी हालत स्थिर बनी हुई थी. एम्स के अनुसार, दुर्भाग्यवश, उनकी स्थिति पिछले 36 घंटों में बिगड़ी और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया. हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद हमने उन्हें खो दिया. एम्स ने कहा कि हम पूरे देश को हुई इस अपूरणीय क्षति एवं दुख में शरीक हैं.
वाजपेयी के निधन की सूचना मिलते ही बीजेपी मुख्यालय शोक में डूब गया. सरकार ने वाजपेयी के सम्मान में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा.
राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर अंतिम संस्कार
अटल बिहारी वाजपेयी का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह कृष्ण मेनन मार्ग से अकबर रोड, इंडिया गेट, पं. दीनदयाल उपाध्याय मार्ग होते हुए भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय मुख्यालय पहुंचेगा जहां सुबह 9 बजे से आम-जन उनका अंतिम दर्शन कर सकेंगे.
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पूर्व प्रधानमंत्री की अंतिम यात्रा शुक्रवार दोपहर 1:00 बजे बीजेपी मुख्यालय से आरंभ होगी जो पं. दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, बहादूर शाह जफर मार्ग, दिल्ली गेट, नेताजी सुभाष मार्ग, निषाद राज मार्ग और शांति वन चौक से गुजरते हुए राष्ट्रीय स्मृति स्थल (विजय घाट, राज घाट) पहुंचेगी जहां शाम 4 बजे उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाएगा.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वाजपेयी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि सौम्यता की महान मूर्ति अटलजी की कमी सभी को खलेगी.
उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उनके निधन को देश के लिये अपूर्णीय क्षति बताया. नायडू ने अपने शोक संदेश में कहा ‘‘यह समाचार बेहद दुखद है कि अटल जी नहीं रहे. मैं आज सुबह ही उनकी सेहत की जानकारी लेने के लिये एम्स गया था. मैं सोच भी नहीं सकता हूं कि यह दुखद समाचार इतनी जल्दी मिलेगा.’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाजपेयी के निधन को अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन का प्रत्येक पल राष्ट्र को समर्पित कर दिया था और उनका जाना, एक युग का अंत है. मोदी ने कहा, ‘‘ मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है. हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे. अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था. उनका जाना, एक युग का अंत है.’’
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा, ‘‘आज भारत ने अपना एक महान सपूत खो दिया. वाजपेयी जी को करोड़ों लोग स्नेह और सम्मान देते थे. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं चाहने वालों के साथ हैं. हम उनकी कमी महसूस करेंगे.’’
पूर्व उप-प्रधानमंत्री एवं बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि 65 वर्षो का साथ छूट गया. अटल जी को केंद्र में पहली स्थिर और गैर कांग्रेसी सरकार के अगुवा के रूप में याद किया जाएगा. मुझे छह साल तक उनके ‘डिप्टी’ के तौर पर काम करने का विशेष अधिकार मिला. वरिष्ठ के रूप में हमेशा मुझे हर संभव तरीके से प्रोत्साहित किया.
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति वाजपेयी की सेवाओं को लंबे समय तक याद किया जाएगा.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वे एक शानदार वक्ता, कवि और देशभक्त थे जिनका निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उनका जाना देश के लिए एक बड़ी क्षति है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने वाजपेयी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए इसे देश के लिये बड़ा नुकसान बताया. केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा ‘‘मुझे बहुत दुख है, यह देश के लिये बड़ा नुकसान है.’’
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वाजपेयी का राजनीतिक सफर
वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक स्कूल टीचर कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर हुआ था. वर्तमान में उनके जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई की. उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से एमए किया. कम्युनिज्म से थोड़े दिन के लगाव के बाद 1947 में वह आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए.
अटल बिहारी वाजपेयी ने 1947 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्णकालिक प्रचारक बने. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कुल मिलाकर 47 साल तक संसद के सदस्य रहे. वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए.
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1996 में केंद्र की सत्ता में बीजेपी की ताजपोशी वाजपेयी की कमान में ही हुई थी. हालांकि यह सत्ता मात्र 13 दिन की थी. वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व के बल पर ही बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन की सरकार 1998 में फिर सत्ता में लौटी और इस बार 13 महीने में सरकार अविश्वास प्रस्ताव की अग्नि परीक्षा को पास नहीं कर पाई और गिर गई. अक्तूबर 1999 में बनी बीजेपी की अगली सरकार ने उनके नेतृत्व में अपना कार्यकाल पूरा किया.
भाषाओं, विचारधाराओं और संस्कृतियों के भेद से परे एक कद्दावर और यथार्थवादी करिश्माई राजनेता, वाजपेयी एक प्रबुद्ध वक्ता और शांति के उपासक होने के साथ साथ हरदिल अजीज और मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे.
भाषाओं, विचारधाराओं और संस्कृतियों के भेद से परे एक कद्दावर और यथार्थवादी करिश्माई राजनेता, वाजपेयी एक प्रबुद्ध वक्ता और शांति के उपासक होने के साथ साथ हरदिल अजीज और मंझे हुए राजनीतिज्ञ थे.
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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