चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण में देरी, चांद की सतह पर पहुंचने की दौड़ में इजरायल से पिछड़ सकता है भारत
भारत और इजरायल के बीच चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बनने के लिए प्रतिस्पर्धा चल रही है.
भारत के महत्वकांक्षी चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण में देरी की खबर है. अक्टूबर में चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया जाना था लेकिन कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते इसे 2019 तक के लिए टाल दिया गया है. इसी के साथ इजरायल को चांद की सतह पर सॉफ्ट लेंडिंग कराने के मामले में भारत को पछाड़ने का मौका मिल गया है.
इस साल के अन्त में इजरायल की एक कंपनी चांद पर अपना मिशन भेजने वाली है. इजरायल अमेरिका के फेल्कोन-9 रॉकेट के जरिए चंद्रमा पर अपना मिशन भेजेगा जिसके 13 फरवरी को चांद की सतह पर पहुंचने की संभावना है. भारत और इजरायल के बीच चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बनने के लिए प्रतिस्पर्धा चल रही है.
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एनडीटीवी के अनुसार यूआर राव सेटेलाइट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. एम अन्नादुरई ने इस बात की पुष्टि की है कि चंद्रयान-2 को इस साल अक्टूबर के बजाए साल 2019 में लॉन्च किया जाएगा.
अन्नादुरई ने कहा कि चंद्रयान-2 को अगले साल जनवरी में प्रक्षेपित किया जाएगा और फरवरी में वह चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा. अन्नादुरई ने कहा कि चंद्रयान-2 का वजन बढ़ने की वजह से जीएसएलवी एमके-2 की बजाए जीएसएलवीएमके-3 का इस्तेमाल किया जाएगा. इस रॉकेट को 'द बाहुबली' भी कहा जाता है जिसका वजन 640 टन है.
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बता दें कि चंद्रयान-2 के जरिए भारत की कोशिश दुनिया को चांद की सतह पर अपनी सॉफ्ट लैंडिंग कराने की पावर दिखाने की भी है. चंद्रयान-2 चांद की सतह पर भारत के ध्वज और प्रतीक का स्थायी छाप छोड़ेगा.
बता दें कि साल 2008 में भारत ने चांद पर अपना पहला मिशन चंद्रयान-1 छोड़ा था. लेकिन तब भारत ने चांद पर क्रैश लैंडिंग कराई थी जिसे की हार्ड लैंडिंग भी कहा जाता है. इसरो का कहना है कि क्रैश लैंडिंग की वजह से एमआईपी कई टुकड़ों में टूट गया था.
अभी तक चांद पर अमेरिका, रूस और चीन तीन ही देश सॉफ्ट लैंडिंग करा पाए हैं. चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के बाद इजरायल के पास यह कारनामा करने वाला चौथा देश बनने का मौका है.
