जिसने दुनिया को खतरनाक रेनसमवेयर से बचाया वह अमेरिका मेें गिरफ्तार
दुनिया को वॉनाक्राई रेनसमवेयर वायरस से छुटकारा दिलाने वाले मार्कस हचिंस को हैकिंग में आरोप में गिरफ्तार किया गया है. ब्रिटेन के शोधकर्ता मार्कस पर बैंक अकाउंट पासवर्ड हैक करने के लिए एक मैलिशिय सॉफ्टवेयर डिजाइन करने का आरोप लगाया गया है.
दुनिया को वॉनाक्राई रेनसमवेयर वायरस से छुटकारा दिलाने वाले मार्कस हचिंस को हैकिंग में आरोप में गिरफ्तार किया गया है. ब्रिटेन के शोधकर्ता मार्कस पर बैंक अकाउंट पासवर्ड हैक करने के लिए एक मैलिशिय सॉफ्टवेयर डिजाइन करने का आरोप लगाया गया है.
साइबर सिक्योरिटी समुदाय के लिए मार्कस की गिरफ्तारी एक झटके जैसा है. कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं. बता दें कि मार्कस ने ही वॉनाक्राई के हमले को रोकने में मदद की थी. वॉनाक्राई के चलते कई देशों में कंप्यूटर्स हैक कर लिए गए थे.
मार्कस को लाॅस वेगास से तब गिरफ्तार किया गया जब वो हैकर्स और सूचना सुरक्षा गुरुओं के एक सम्मेलन के लिए जा रहा था. मार्कस पर क्रोनोस बैंकिंग ट्रोजन नाम के एक मालवेयर को बनाने और बांटने का आरोप है.
क्या करता है मालवेयर
जब एक असंदिग्ध यूजर बैंक या अन्य विश्वसनीय स्थान पर जाता है, तो यह मालवेयर साइबर थेफ्ट के लिए वेब ब्राउजर्स को संक्रमित कर देता है, उसके बाद यूजरनेम और पासवर्ड को कैप्चर कर लेता है.
एक सम्मानित साइबरसिक्योंरिटी शोधकर्ता ने कहा, मुझे यकीन नहीं होता कि मार्कस दोषी है. जो मैं उसके बारे में जानता हूं तो ये आरोप स्वीकार नहीं कर सकता.'
प्राधिकरण के कहा कि ये मालवेयर पहली बार सबसे पहले साल 2014 की शुरुआत में उपलब्ध हुआ था. इसे 'एल्फाबे' के जरिए मार्केट और डिस्ट्रीब्यूट किया गया था, जो टोर नेटवर्क पर एक छुपी हुई सर्विस है.
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