वैज्ञानिक करेंगे सीवेज में कोरोना संक्रमण की जांच, मिलेगी काम की जानकारी

वैज्ञानिक करेंगे सीवेज में कोरोना संक्रमण की जांच, मिलेगी काम की जानकारी
कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान में सीवेज की जांच अहम साबित हो सकती है.

कोरोना वायरस (Corona virus) के प्रसार से निपटने के लिए अब वैज्ञानिक सीवेज (Sewage) में भी वायरस की मौजूदगी की जांच कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2020, 2:22 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस  (Corona virus) दुनिया भर में फैलते हुए तबाही मचा रहा है. इसको फैलने से रोकने के लिए की जा रही कोशिशों के सामने कई चुनौतियां आ रही हैं. इससे निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने संक्रमित इलाकों की पहचान के लिए सीवेज (Sewage) जांच की मदद लेने का फैसला किया है.

अमेरिका में होगी इस तरह की जांच
अब अमेरिका में वैज्ञानिक कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान करने के लिए सीवेज की जांच करेंगे. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ता अब  सीवेज की जांच कर यह पता लगाएंगे कि किन क्षेत्रों से सार्स कोव-2 संक्रमित मल सीवेज में आ रहा है.

संक्रमण को रोकना बहुत जरूरी है



इस समय सार्स कोव-2 का प्रसार रोकने के लिए संक्रमण की पहचान सबसे बड़ी चुनौती है क्यों बहुत से ऐसे मामले आने लगे हैं जिनमें संक्रमित व्यक्ति को पता तक नहीं होता कि वह संक्रमित हैं. ऐसे में सीवेज की जांच बहुत कुछ जानकारी दे सकती है.



कोरोना संक्रमण में अब बिना लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.


क्या पता चलेगा सीवेज की जांच से
सीवेज जांच से वैज्ञानिकों को पता चलेगा कि किन इलाकों में अब भी कोरोना संक्रमित मरीज मौजूद है जिनकी उपस्थिति का पता नहीं चला है. इससे यह भी पता चलेगा कि क्या इस तरह के किसी क्षेत्र में संक्रमण फैल रहा है और यह भी ऐसे कितने क्षेत्र हैं.

अमेरिका के इस क्षेत्र में हो चुकी है एक हफ्ते तक जांच
अमेरिका के न्यू कासल काउंटी एक्जीक्यूटिव मैट मेयर ने एक टेलीविजन चैनल पर यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि उनकी काउंटी का एमआईटी के स्टार्टअप बिगोट से टाई अप हुआ है. काउंटी के एक हफ्ते की जांच हो चुकी है और जल्द ही उसके नतीजे भी आ जाएंगे.

इस पद्धति से अहम जानकारी मिलेगी
मेयर ने अपनी बातचीत में कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि जब हम हर हफ्ते इस तरह की जांच करेंगे तो हमें देश में संक्रमण की संख्याओं की विविधता के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी. इसके आंकड़े हमारे लिए बहुत उपयोगी होंगे. हम हॉटस्पॉट्स की पहचान करना चाहते हैं. इस तरह की दस जांच शाखाएं साढ़े पांच लाख लोगों के लिए  उपलब्ध कराना चाहते हैं.”

नीदरलैंड में मामले आने से पहले पता चल गया था संक्रमण
इससे पहले पिछले महीने नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने वेस्टवाटर या सीवेज की जांच कर संक्रमण का पता लगाया था जबकि तब तक उस क्षेत्र में कोरोना संक्रमण मामले सामने नहीं आए थे. कोरोना वायरस मरीज के शरीर में जब होता है तो वह उसके मल में भी होता है. मलनिकासी के बाद सीवेज के जरिए वह मल नालियों से होते हुए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स तक पहुंच जाता है. ऐसे में सीवेज की जांच से उस क्षेत्र में संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा सकता है.

संक्रमण की गंभीरता का भी पता चल सकता है
ऐसे में अगर किसी इलाके में संक्रमित लोगों की संख्या ज्यादा हुई तो इसका पता सीवेज की जांच से पता चल सकता है क्योंकि वहां के सीवेज में संक्रमित मल की मात्रा ज्यादा होगी यानि कि सीवेज में ही संक्रमण की मात्रा ज्यादा होगी.

मामलों से पहले पता चली यह बात
नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने 5 मार्च को नीदरलैंड के एमर्सफुर्ट के एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के सीवेज में कोरोना वायरस के जेनेटिक मटेरियल पाया था. तब तक उस क्षेत्र में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया था जबकि देश में पहला मामला 27 फरवरी को सामने आया था. बाद में बहुत से स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित पाए गए थे.

इन बातों का भी रखना होगा ध्यान
तब शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि सीवेज की जांच से कम्युनिटी संक्रमण के पता चल सकता है. लेकिन इस मामले में सीवेज कर्मचारियों के जोखिम का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अभी तक ऐसे संकेत तो नहीं मिले हैं कि सीवेज के मल से संक्रमण फैल सकता है. इसकी संभावना भी कम है.

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