पंडित जसराज सादगी से भरपूर थे. वे बड़ी सहजता से कलाकारों के घर पहुंच जाते थे. एक बार जब पंडित जसराज एक कार्यक्रम के लिए विदिशा आए तो उन्हें पारिश्रमिक भी नहीं दिया गया था, और न उन्होंने इस तरह की कोई मांग ही की.
इस नश्वर संसार में पंडित जसराज के देहांत की ख़बर ने निश्चय ही उनके कद्रदानों को हतप्रभ कर दिया है. सत्रह अगस्त उनके महाप्रस्थान की तारीख़ बनी. अंतिम सांस उन्होंने अमेरिका में ली लेकिन नाद के इस नायक की रूह में आखि़र तक अपने वतन का राग गूंजता रहा.
पंडित जसराज (Pandit Jasraj) संगीत मार्तंड थे. मेवाती घराने (Mewati GHarana) के संगीत को उन्होंने और समृद्ध भी किया. उसे और ख्याति भी दी. हालांकि संगीत के सुरों के साथ उनकी जिंदगी में प्यार के सुर भी थे. ओडिसी डांसर प्रोतिमा बेदी (Odissi Dancer Protim...
संगीत मार्तंड पंडित जसराज का सोमवार को निधन हो गया. इसके साथ ही उनके सुर ब्रम्हाण्ड में विलीन हो गए हैं. उनकी खनकती, रसीली और मधुर आवाज के जादू ने देश के ही नहीं, सात समंदर पार के श्रोताओं को आनंद सागर में आकंठ डुबोया है. सुरों का यह सुनहरा सूर्य हर ...
मेवाती घराने (Mewati gharana) से जुड़ने के बाद पंडित जसराज (Pandit Jasraj) ने जुगलबंदी का एक नया रूप बनाया, जिसे जसरंगी कहते हैं.
एक बार बड़े गुलाम अली ने पंडित जसराज से कहा कि तुम मेरे शागिर्द बन जाओ. इस प्रस्ताव को सकुचाते हुए ठुकराकर जसराज ने जवाब दिया, ‘चचा जान, ‘मैं आपसे गाना नहीं सीख सकता. क्योंकि मैं अपने पिता (पंडित मोतीराम) को जिंदा करना चाहता हूं.’ यह सुनकर उस्ताद की ...