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Loksabha Election 2019: बिहार के दूसरे 'चित्तौड़गढ़' महाराजगंज की प्रजा किसे देगी जीत की सौगात ?
Loksabha Election 2019: बिहार के दूसरे 'चित्तौड़गढ़' महाराजगंज की प्रजा किसे देगी जीत की सौगात ?
Agency:News18 Bihar
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महाराजगंज लोकसभा का गठन 2 जिलों की 6 विधानसभा सीटों को मिलाकर हुआ है. सीवान जिले का गोरयाकोठी और महाराजगंज और सारण जिले का एकमा, मांझी, बनियापुर और तरैया महाराजगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है.

महाराजगंज को बिहार का दूसरा 'चित्तौड़गढ़' कहा जाता है. क्योंकि इस इलाके में सबसे ज्यादा आबादी राजपूतों की है. जाहिर है इसका असर यहां की सियासत पर भी है. अब तक यहां से ज्यादातर राजपूत जाति के उम्मीदवार लोकसभा पहुंचते रहे हैं. महेंद्र नारायण सिंह, कृष्णकांत सिंह, एमपी सिंह, रामदेव सिंह, कृष्ण प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, गिरिजा देवी, राम बहादुर सिंह, प्रभुनाथ सिंह महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी 1989 में यहां से चुनाव लड़े थे जिसमें उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी. राजपूत बाहुल्य इस क्षेत्र में आबादी के लिहाज से दूसरे स्थान पर भूमिहार, तीसरे स्थान पर यादव और चौथे स्थान पर ब्राह्मण हैं.
महाराजगंज में 2 जिलों की 6 विधानसभा सीटें
महाराजगंज लोकसभा का गठन 2 जिलों की 6 विधानसभा सीटों को मिलाकर हुआ है. सीवान जिले का गोरयाकोठी और महाराजगंज और सारण जिले का एकमा, मांझी, बनियापुर और तरैया महाराजगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है.
ये भी पढ़ें- Loksabha Election 2019: 'यादव लैंड' में क्या इस बार भी चलेगी सियासत की उल्टी आंधी ?
सिग्रीवाल ने जीता था प्रजा का मन
2014 के लोकसभा चुनाव में महाराजगंज से BJP के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने RJD के प्रभुनाथ सिंह को करारी मात दी थी. BJP के सिग्रीवाल को 3,20,645 वोट मिले थे. जबकि 2,82171 वोट पाकर प्रभुनाथ सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे. JDU के मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को 1,49436 वोट मिले थे. इस बार JDU के NDA में आ जाने से गठबंधन को फायदा मिल सकता है.
महाराजगंज की प्रजा में रोष !
महाराजगंज को जिला बनाने की मांग सालों पुरानी है. जो इसबार भी पूरी नहीं हुई. लोगों की शिकायत है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार व्याप्त है. जिसे खत्म करने की कोशिश नहीं हुई. रेलमार्ग बना लेकिन रेलगाड़ी नहीं दौड़ी. इलाके की कई सड़कें जर्जर हैं. कृषि से जुड़ी कोई योजना धरातल पर नहीं उतरी.
भ्रष्टाचार के कारण ज्यादातर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला.उद्योग विहीन इस इलाके में बेरोजगारी और पलायन चरम पर है. चुनाव नजदीक आते ही सांसद और सरकार के काम की समीक्षा होने लगी है.काम के आधार पर लोग अपनी राय बना रहे हैं.
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आदर्श ग्राम का हाल
यहां के एकमा प्रखंड के बरेजा गांव को सांसद जनार्दन सिग्रीवाल ने गोद लिया है. दरअसल यहां से पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कई यादें जुड़ी हुईं हैं. आजादी की लड़ाई में इस गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था.
हालांकि हकीकत यह है कि आदर्श ग्राम में PM मोदी का स्वच्छ भारत अभियान दम तोड़ रहा है. सड़क पर नालियों का गंदा पानी बह रहा है. गांव में बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी है. सांसद ने गांव में सोलर लाइट लगवाई है, लेकिन उसमें से ज्यादातर जलती नहीं.
महाराजगंज इलाके में सिंचाई की व्यवस्था कैसी है ये बरेजा गांव की नहर बताने के लिए काफी है. सरकार ने नहर को पक्का तो करवा दिया. लेकिन उसमें सालों से पानी नहीं आया है. कृषि पर निर्भर रहने वाले इलाके के किसान बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं.
भी पढ़ें- Loksabha Election 2019: 'राजनीति की तपोभूमि' बांका में क्या इस बार भी बहेगी सियासत की उल्टी हवा ?
आदर्श ग्राम के लोगों की शिकायत है कि गांव को गोद लेने के बाद सांसद कभी इलाके में आए ही नहीं. यहां जो थोड़े-बहुत काम हुए वो उनके करीबियों के माध्यम से कराए गए. काम का क्वालिटी बेहद घटिया है.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
हालांकि सांसद का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जितना काम किया है उतना काम अब तक किसी ने नहीं किया है. सांसद सिग्रीवाल का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए 35 करोड़ रुपये खर्च किए.
2332 योजनाओं को स्वीकृति दिलाई इनमें1944 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. 388 योजनाओं पर काम चल रहा है. सांसद ने अपने फंड से 1250 छठ घाटों का निर्माण कराया है. हालांकि हकीकत ये है कि उनमें से ज्यादतर घाटों की स्थिति ठीक नहीं है.
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विकास के दावे
सांसद का दावा है कि उन्होंने समाज के हर तबके के लिए काम किया. NH-101 और NH-84 की मरम्मत कराई. गांव और बाजार में सोलर लाइट लगवाई. महाराजगंज-मशरख रेलखंड को चालू कराया. रेलखंड के लिए सांसद निधि से 350 करोड़ रुपये खर्च किए. उनके प्रयास से सैकड़ों गांवों में बिजली पहुंची और PMGSY के तहत कई सड़कों का निर्माण हुआ.
सांसद सिग्रीवाल का दावा है कि उनके प्रयास से जलालपुर में ITBP के कैम्प की स्थापना हुई, जहां बहाली और ट्रेनिंग दोनों का सेंटर है. ITBP का सेंटर बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला. साथ ही वह महाराजगंज को जिला बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
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किस्मत की चाबी प्रजा के हाथ
महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र में हर बार चुनाव काफी दिलचस्प होता है. इस बार भी इस सीट पर चुनाव लड़ने के कई दावेदार हैं. 3 बार यहां के सांसद रहे प्रभुनाथ सिंह के बेटे और पूर्व विधायक रणधीर सिंह चुनावी तैयारी में जुट गए हैं. रणधीर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के विकास और पिता के सपने को पूरा करने के लिए वो लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.
महाराजगंज का महाराजा बनने के कई दावेदार हैं. सबके अपने दावे हैं और सबकी अपनी तैयारी है, लेकिन उनकी किस्मत की चाबी जनता के हाथों में है. अब देखना है महाराजगंज की जनता किसे इस बार अपना महाराजा बनाती है.
रिपोर्ट - संतोष कुमार गुप्ता
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी 1989 में यहां से चुनाव लड़े थे जिसमें उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी. राजपूत बाहुल्य इस क्षेत्र में आबादी के लिहाज से दूसरे स्थान पर भूमिहार, तीसरे स्थान पर यादव और चौथे स्थान पर ब्राह्मण हैं.
महाराजगंज में 2 जिलों की 6 विधानसभा सीटें
महाराजगंज लोकसभा का गठन 2 जिलों की 6 विधानसभा सीटों को मिलाकर हुआ है. सीवान जिले का गोरयाकोठी और महाराजगंज और सारण जिले का एकमा, मांझी, बनियापुर और तरैया महाराजगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है.
ये भी पढ़ें- Loksabha Election 2019: 'यादव लैंड' में क्या इस बार भी चलेगी सियासत की उल्टी आंधी ?
सिग्रीवाल ने जीता था प्रजा का मन
2014 के लोकसभा चुनाव में महाराजगंज से BJP के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने RJD के प्रभुनाथ सिंह को करारी मात दी थी. BJP के सिग्रीवाल को 3,20,645 वोट मिले थे. जबकि 2,82171 वोट पाकर प्रभुनाथ सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे. JDU के मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को 1,49436 वोट मिले थे. इस बार JDU के NDA में आ जाने से गठबंधन को फायदा मिल सकता है.
महाराजगंज से बीजेपी के सांसद जनार्दन प्रसाद सिग्रीवाल
महाराजगंज की प्रजा में रोष !
महाराजगंज को जिला बनाने की मांग सालों पुरानी है. जो इसबार भी पूरी नहीं हुई. लोगों की शिकायत है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार व्याप्त है. जिसे खत्म करने की कोशिश नहीं हुई. रेलमार्ग बना लेकिन रेलगाड़ी नहीं दौड़ी. इलाके की कई सड़कें जर्जर हैं. कृषि से जुड़ी कोई योजना धरातल पर नहीं उतरी.
भ्रष्टाचार के कारण ज्यादातर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला.उद्योग विहीन इस इलाके में बेरोजगारी और पलायन चरम पर है. चुनाव नजदीक आते ही सांसद और सरकार के काम की समीक्षा होने लगी है.काम के आधार पर लोग अपनी राय बना रहे हैं.
ये भी पढ़ें- Loksabha Election 2019: हाई प्रोफाइल सारण के 'रण' में कौन जीतेगा जनता का मन ?
आदर्श ग्राम का हाल
यहां के एकमा प्रखंड के बरेजा गांव को सांसद जनार्दन सिग्रीवाल ने गोद लिया है. दरअसल यहां से पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कई यादें जुड़ी हुईं हैं. आजादी की लड़ाई में इस गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था.
हालांकि हकीकत यह है कि आदर्श ग्राम में PM मोदी का स्वच्छ भारत अभियान दम तोड़ रहा है. सड़क पर नालियों का गंदा पानी बह रहा है. गांव में बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी है. सांसद ने गांव में सोलर लाइट लगवाई है, लेकिन उसमें से ज्यादातर जलती नहीं.
महाराजगंज का प्रसिद्ध मउनिया बाबा
महाराजगंज इलाके में सिंचाई की व्यवस्था कैसी है ये बरेजा गांव की नहर बताने के लिए काफी है. सरकार ने नहर को पक्का तो करवा दिया. लेकिन उसमें सालों से पानी नहीं आया है. कृषि पर निर्भर रहने वाले इलाके के किसान बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं.
भी पढ़ें- Loksabha Election 2019: 'राजनीति की तपोभूमि' बांका में क्या इस बार भी बहेगी सियासत की उल्टी हवा ?
आदर्श ग्राम के लोगों की शिकायत है कि गांव को गोद लेने के बाद सांसद कभी इलाके में आए ही नहीं. यहां जो थोड़े-बहुत काम हुए वो उनके करीबियों के माध्यम से कराए गए. काम का क्वालिटी बेहद घटिया है.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
हालांकि सांसद का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जितना काम किया है उतना काम अब तक किसी ने नहीं किया है. सांसद सिग्रीवाल का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए 35 करोड़ रुपये खर्च किए.
2332 योजनाओं को स्वीकृति दिलाई इनमें1944 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. 388 योजनाओं पर काम चल रहा है. सांसद ने अपने फंड से 1250 छठ घाटों का निर्माण कराया है. हालांकि हकीकत ये है कि उनमें से ज्यादतर घाटों की स्थिति ठीक नहीं है.
ये भी पढ़ें- Loksabha Election 2019: रेणु के 'आंगन' में फिर जलेगी लालटेन या खिलेगा कमल?
विकास के दावे
सांसद का दावा है कि उन्होंने समाज के हर तबके के लिए काम किया. NH-101 और NH-84 की मरम्मत कराई. गांव और बाजार में सोलर लाइट लगवाई. महाराजगंज-मशरख रेलखंड को चालू कराया. रेलखंड के लिए सांसद निधि से 350 करोड़ रुपये खर्च किए. उनके प्रयास से सैकड़ों गांवों में बिजली पहुंची और PMGSY के तहत कई सड़कों का निर्माण हुआ.
सांसद सिग्रीवाल का दावा है कि उनके प्रयास से जलालपुर में ITBP के कैम्प की स्थापना हुई, जहां बहाली और ट्रेनिंग दोनों का सेंटर है. ITBP का सेंटर बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला. साथ ही वह महाराजगंज को जिला बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
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किस्मत की चाबी प्रजा के हाथ
महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र में हर बार चुनाव काफी दिलचस्प होता है. इस बार भी इस सीट पर चुनाव लड़ने के कई दावेदार हैं. 3 बार यहां के सांसद रहे प्रभुनाथ सिंह के बेटे और पूर्व विधायक रणधीर सिंह चुनावी तैयारी में जुट गए हैं. रणधीर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के विकास और पिता के सपने को पूरा करने के लिए वो लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.
प्रभुनाथ सिंह और लालू प्रसाद (फाइल फोटो)
महाराजगंज का महाराजा बनने के कई दावेदार हैं. सबके अपने दावे हैं और सबकी अपनी तैयारी है, लेकिन उनकी किस्मत की चाबी जनता के हाथों में है. अब देखना है महाराजगंज की जनता किसे इस बार अपना महाराजा बनाती है.
रिपोर्ट - संतोष कुमार गुप्ता
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