जयपुर के मशहूर ग़ज़ल गायक अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन ने आप बीती साझा करते हुए कहा था- "हम दोनों भाइयों को भी अपने बेटे-बेटी की मौत का कहर झेलना पड़ा. हमने सुरों की उंगली थामी और फिर जि़ंदगी की राह पर क़दम बढ़ाए...". यादें मौसिकी में बदल गयीं.
ये सच है कि संगीत (Music) आत्मा की पुकार है. यह एक ऐसी कला (Art) है जिसमें नौ रसों को व्यक्त करना सबसे आसान है. यही वजह है कि कई बरसों से अलग-अलग सभ्यताओं ने संगीत को अपनी अभिव्यक्ति का ज़रिया (Mode of expression) बनाया है. चाहे वह राजे-रजवाड़े की महफि...
पंडित जसराज (Pandit Jasraj) के अंतिम दर्शन (Last Rites) की तस्वीरें सामने आई हैं.
पंडित जसराज (Pandit Jasraj) का अंतिम संस्कार (Funeral) विले पार्ले के पवन हंस श्मशान भूमि (Pawan Hans Shamshan Ghat) पर किया जाएगा.
Classical music singer Pandit Jasra Death Updates: शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का अंतिम संस्कार गुरुवार को मुंबई में किया जाएगा. अंतिम संस्कार में पंडित जसराज को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी.
पंडित जसराज सादगी से भरपूर थे. वे बड़ी सहजता से कलाकारों के घर पहुंच जाते थे. एक बार जब पंडित जसराज एक कार्यक्रम के लिए विदिशा आए तो उन्हें पारिश्रमिक भी नहीं दिया गया था, और न उन्होंने इस तरह की कोई मांग ही की.
शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध गायक पंडित जसराज (Pandit Jasraj) इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. मेवाती घराने के पंडित जसराज का सोमवार को अमेरिका (America) में निधन हो गया. वे 90 साल के थे. उन्होंने अमेरिका के न्यू जर्सी में अपनी अंतिम सांस ली. पंडित जस...
इस नश्वर संसार में पंडित जसराज के देहांत की ख़बर ने निश्चय ही उनके कद्रदानों को हतप्रभ कर दिया है. सत्रह अगस्त उनके महाप्रस्थान की तारीख़ बनी. अंतिम सांस उन्होंने अमेरिका में ली लेकिन नाद के इस नायक की रूह में आखि़र तक अपने वतन का राग गूंजता रहा.
पंडित जसराज (Pandit Jasraj) संगीत मार्तंड थे. मेवाती घराने (Mewati GHarana) के संगीत को उन्होंने और समृद्ध भी किया. उसे और ख्याति भी दी. हालांकि संगीत के सुरों के साथ उनकी जिंदगी में प्यार के सुर भी थे. ओडिसी डांसर प्रोतिमा बेदी (Odissi Dancer Protim...
संगीत मार्तंड पंडित जसराज का सोमवार को निधन हो गया. इसके साथ ही उनके सुर ब्रम्हाण्ड में विलीन हो गए हैं. उनकी खनकती, रसीली और मधुर आवाज के जादू ने देश के ही नहीं, सात समंदर पार के श्रोताओं को आनंद सागर में आकंठ डुबोया है. सुरों का यह सुनहरा सूर्य हर ...
मेवाती घराने (Mewati gharana) से जुड़ने के बाद पंडित जसराज (Pandit Jasraj) ने जुगलबंदी का एक नया रूप बनाया, जिसे जसरंगी कहते हैं.
एक बार बड़े गुलाम अली ने पंडित जसराज से कहा कि तुम मेरे शागिर्द बन जाओ. इस प्रस्ताव को सकुचाते हुए ठुकराकर जसराज ने जवाब दिया, ‘चचा जान, ‘मैं आपसे गाना नहीं सीख सकता. क्योंकि मैं अपने पिता (पंडित मोतीराम) को जिंदा करना चाहता हूं.’ यह सुनकर उस्ताद की ...